Correct Answer:
Option A - स ‘दुन्दुभे:’ शब्दम् अशृणोत्।
अर्थात् – वह (सियार) दुन्दुभ के शब्द को सुना। गद्यांश में वर्णित ‘अशृणोत्’ पद श्रु (सुनना) धातु लङ् लकार प्रथम पुरुष, एकवचन में बनता है। यह (श्रु) धातु भ्वादिगण के अन्तर्गत आते हैं। इस गण के अन्तर्गत आने वाले धातु-भू, हस्, पठ्, रक्ष्, वद्, पच् इत्यादि आते हैं।
A. स ‘दुन्दुभे:’ शब्दम् अशृणोत्।
अर्थात् – वह (सियार) दुन्दुभ के शब्द को सुना। गद्यांश में वर्णित ‘अशृणोत्’ पद श्रु (सुनना) धातु लङ् लकार प्रथम पुरुष, एकवचन में बनता है। यह (श्रु) धातु भ्वादिगण के अन्तर्गत आते हैं। इस गण के अन्तर्गत आने वाले धातु-भू, हस्, पठ्, रक्ष्, वद्, पच् इत्यादि आते हैं।