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Q: कृष्णदेवराय की कृतियों में से एक ‘अमुक्तमाल्यद’ इस भाषा में लिखी गई थी।
  • A. तेलुगू
  • B. तमिल
  • C. कन्नड़
  • D. संस्कृत
Correct Answer: Option A - कृष्णदेवराय (1509-1529) विजयनगर साम्राज्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा थे। वे स्वयं कवि एवं कवियों के संरक्षक थे तेलुगू भाषा में उनका काव्य ‘आमुक्तमाल्यद’ साहित्य का एक रत्न है। तेलुगू भाषा के आठ प्रसिद्ध कवि उनके दरबार में थे जो ‘अष्टदिग्गज’ के नाम से प्रसिद्ध थे। इतिहासकार तेजपाल सिंह धामा ने हिन्दी में इनके जीवन पर प्रामाणिक उपन्यास ‘आंध्रभोज’ लिखा है। कृष्णदेव राय विजयनगर का महानतम शासक था। बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में जिन भारतीय राज्यों का उल्लेख किया है, उनमें विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय को तत्कालीन भारत का सबसे शक्तिशाली शासक कहा है। कृष्णदेवराय एक महान विद्वान, विद्याप्रेमी व विद्वानों के संरक्षक भी थे। इसलिए इन्हे तेलुगू भोज तथा आन्ध्र भोज कहा जाता है। इनका काल तेलुगू साहित्य का क्लासिकल युग माना जाता है। कृष्णदेवराय ने संस्कृत भाषा में ‘‘जाम्बवती कल्याणम्’ और ‘उषा परिणय’ की रचना की।
A. कृष्णदेवराय (1509-1529) विजयनगर साम्राज्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा थे। वे स्वयं कवि एवं कवियों के संरक्षक थे तेलुगू भाषा में उनका काव्य ‘आमुक्तमाल्यद’ साहित्य का एक रत्न है। तेलुगू भाषा के आठ प्रसिद्ध कवि उनके दरबार में थे जो ‘अष्टदिग्गज’ के नाम से प्रसिद्ध थे। इतिहासकार तेजपाल सिंह धामा ने हिन्दी में इनके जीवन पर प्रामाणिक उपन्यास ‘आंध्रभोज’ लिखा है। कृष्णदेव राय विजयनगर का महानतम शासक था। बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में जिन भारतीय राज्यों का उल्लेख किया है, उनमें विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय को तत्कालीन भारत का सबसे शक्तिशाली शासक कहा है। कृष्णदेवराय एक महान विद्वान, विद्याप्रेमी व विद्वानों के संरक्षक भी थे। इसलिए इन्हे तेलुगू भोज तथा आन्ध्र भोज कहा जाता है। इनका काल तेलुगू साहित्य का क्लासिकल युग माना जाता है। कृष्णदेवराय ने संस्कृत भाषा में ‘‘जाम्बवती कल्याणम्’ और ‘उषा परिणय’ की रचना की।

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कृष्णदेवराय (1509-1529) विजयनगर साम्राज्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा थे। वे स्वयं कवि एवं कवियों के संरक्षक थे तेलुगू भाषा में उनका काव्य ‘आमुक्तमाल्यद’ साहित्य का एक रत्न है। तेलुगू भाषा के आठ प्रसिद्ध कवि उनके दरबार में थे जो ‘अष्टदिग्गज’ के नाम से प्रसिद्ध थे। इतिहासकार तेजपाल सिंह धामा ने हिन्दी में इनके जीवन पर प्रामाणिक उपन्यास ‘आंध्रभोज’ लिखा है। कृष्णदेव राय विजयनगर का महानतम शासक था। बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में जिन भारतीय राज्यों का उल्लेख किया है, उनमें विजयनगर के शासक कृष्णदेव राय को तत्कालीन भारत का सबसे शक्तिशाली शासक कहा है। कृष्णदेवराय एक महान विद्वान, विद्याप्रेमी व विद्वानों के संरक्षक भी थे। इसलिए इन्हे तेलुगू भोज तथा आन्ध्र भोज कहा जाता है। इनका काल तेलुगू साहित्य का क्लासिकल युग माना जाता है। कृष्णदेवराय ने संस्कृत भाषा में ‘‘जाम्बवती कल्याणम्’ और ‘उषा परिणय’ की रचना की।