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Q: कश्चिद् बालक: कस्मिन्नपि शीर्षके विचारोत्तेजने सत्यपि कमपि परिच्छेदं लेखितुं न समर्थ:। परन्तु स कस्यापि प्रौढजनस्य, सहपाठिन: वा परामर्शेन एताल्लिखिंतु समर्थों भवति। एष: परामर्श कथ्यते _________।
  • A. सोपाननिर्माणम्
  • B. सहपाठि - अध्यापनम्
  • C. सहपाठि – परामर्श:
  • D. समूहे अध्यापनम्
Correct Answer: Option A - कश्चिद् बालक: कस्मिन्नपि शीर्षके विचारोत्तेजने सत्यपि स्वयमेव कमपि परिच्छेदं लेखितुं न समर्थ:। परन्तु स: कस्यापि प्रौढजनस्य, सहपाठिन: वा परामर्शेन एतल्लिखितुं समर्थो भवति। एष: परामर्श: ‘सोपाननिर्माणम्’ कथ्यते। अर्थात् कोई बालक किसी भी शीर्षक के विचारोत्तेजित होने पर भी स्वयं ही किसी भी परिच्छेद को लिखने के लिए समर्थ नहीं होता है परन्तु वह किसी भी प्रौढ़जन के अथवा सहपाठी के परामर्श से यह लिखने के लिए समर्थ होता है। यह परामर्श ‘सोपाननिर्माण’ कहलाता है।
A. कश्चिद् बालक: कस्मिन्नपि शीर्षके विचारोत्तेजने सत्यपि स्वयमेव कमपि परिच्छेदं लेखितुं न समर्थ:। परन्तु स: कस्यापि प्रौढजनस्य, सहपाठिन: वा परामर्शेन एतल्लिखितुं समर्थो भवति। एष: परामर्श: ‘सोपाननिर्माणम्’ कथ्यते। अर्थात् कोई बालक किसी भी शीर्षक के विचारोत्तेजित होने पर भी स्वयं ही किसी भी परिच्छेद को लिखने के लिए समर्थ नहीं होता है परन्तु वह किसी भी प्रौढ़जन के अथवा सहपाठी के परामर्श से यह लिखने के लिए समर्थ होता है। यह परामर्श ‘सोपाननिर्माण’ कहलाता है।

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कश्चिद् बालक: कस्मिन्नपि शीर्षके विचारोत्तेजने सत्यपि स्वयमेव कमपि परिच्छेदं लेखितुं न समर्थ:। परन्तु स: कस्यापि प्रौढजनस्य, सहपाठिन: वा परामर्शेन एतल्लिखितुं समर्थो भवति। एष: परामर्श: ‘सोपाननिर्माणम्’ कथ्यते। अर्थात् कोई बालक किसी भी शीर्षक के विचारोत्तेजित होने पर भी स्वयं ही किसी भी परिच्छेद को लिखने के लिए समर्थ नहीं होता है परन्तु वह किसी भी प्रौढ़जन के अथवा सहपाठी के परामर्श से यह लिखने के लिए समर्थ होता है। यह परामर्श ‘सोपाननिर्माण’ कहलाता है।