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Q: उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै:। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:।। 1।। सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रवि:। सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम् ।। 2।। सद्भिेव सहासीत सद्भि कुर्वीत सङ्गतिम्। सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भि: किञ्चिदाचरेत्।।3।। मित्रेण कलहं कृत्वा न कदापि सुखी जन:। इति ज्ञात्वा प्रयासेन तदेव परिवर्जयेत्।।4।। प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तव:। तस्मात् प्रियं हि वक्तव्यं वचने का दरिद्रता ।।5।। श्रेष्ठं जनं गुरुं चापि मातरं पितरं तथा। मनसा कर्मणा वाचा सेवेत सततं सदा।।6।। 3.केन कार्याणि सिद्ध्यन्ति?
  • A. उद्यमेन
  • B. मुखेन
  • C. मनोरथेन
  • D. सुप्तेन
Correct Answer: Option A - पद्यानुसार, उद्यमेन कार्याणि सिद्धयन्ति। अर्थात् उद्यम से ही सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
A. पद्यानुसार, उद्यमेन कार्याणि सिद्धयन्ति। अर्थात् उद्यम से ही सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

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पद्यानुसार, उद्यमेन कार्याणि सिद्धयन्ति। अर्थात् उद्यम से ही सभी कार्य सिद्ध होते हैं।