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Q: किस अवधि के दौरान विचार अमूर्त और आदर्शवादी हो जाता है?
  • A. शैशवावस्था
  • B. प्रारंभिक बचपन
  • C. मध्य बचपन
  • D. किशोरावस्था
Correct Answer: Option D - किशोरावस्था की अवधि (12 से 18 वर्ष) के दौरान विचार अमूर्त और आदर्शवादी हो जाता है। इस अवधि में बालक दो अवस्थाओं में रहता है। न तो उसे बालक ही समझा जाता है और न ही प्रौढ़ के रूप में स्वीकृति मिलती है। इस अवधि में मानसिक योग्यताओं का तीव्र गति से विकास होता है। जिज्ञासा, स्मृति, कल्पना, सृजनात्मकता, तर्कशक्ति , निर्णय लेने की क्षमता अधिक विकसित हो जाती है। इस अवधि में बालक समूह को महत्त्व देना, समाज-सेवा की भावना, ईश्वर व धर्म में विश्वास, स्वाभिमान की भावना आदि पर बल देने लगते हैं।
D. किशोरावस्था की अवधि (12 से 18 वर्ष) के दौरान विचार अमूर्त और आदर्शवादी हो जाता है। इस अवधि में बालक दो अवस्थाओं में रहता है। न तो उसे बालक ही समझा जाता है और न ही प्रौढ़ के रूप में स्वीकृति मिलती है। इस अवधि में मानसिक योग्यताओं का तीव्र गति से विकास होता है। जिज्ञासा, स्मृति, कल्पना, सृजनात्मकता, तर्कशक्ति , निर्णय लेने की क्षमता अधिक विकसित हो जाती है। इस अवधि में बालक समूह को महत्त्व देना, समाज-सेवा की भावना, ईश्वर व धर्म में विश्वास, स्वाभिमान की भावना आदि पर बल देने लगते हैं।

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किशोरावस्था की अवधि (12 से 18 वर्ष) के दौरान विचार अमूर्त और आदर्शवादी हो जाता है। इस अवधि में बालक दो अवस्थाओं में रहता है। न तो उसे बालक ही समझा जाता है और न ही प्रौढ़ के रूप में स्वीकृति मिलती है। इस अवधि में मानसिक योग्यताओं का तीव्र गति से विकास होता है। जिज्ञासा, स्मृति, कल्पना, सृजनात्मकता, तर्कशक्ति , निर्णय लेने की क्षमता अधिक विकसित हो जाती है। इस अवधि में बालक समूह को महत्त्व देना, समाज-सेवा की भावना, ईश्वर व धर्म में विश्वास, स्वाभिमान की भावना आदि पर बल देने लगते हैं।