Correct Answer:
Option B - ‘किरातार्जुनीयम्’ में भारवि का अर्थ गौरव ही उनके यश: प्रशस्ति का मुख्य आधार है। गागर में सागर भरना अथवा अल्प शब्दों में विपुल अर्थ का सन्निवेश करना भारवि की अपनी विशेषता रही है। मल्लिनाथ के शब्दों में ऐसे स्थल `नारिकेल फलसम्मित' है। यह 18 सर्गों में निबद्ध महाकवि भारवि का एकमात्र महाकाव्य है जिसमें कौरवों पर विजय प्राप्ति के लिए अर्जुन का हिमालय पर्वत पर जाकर तपस्या करना, किरातवेशधारी शिव से युद्ध और प्रसन्न शिव से पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है।
B. ‘किरातार्जुनीयम्’ में भारवि का अर्थ गौरव ही उनके यश: प्रशस्ति का मुख्य आधार है। गागर में सागर भरना अथवा अल्प शब्दों में विपुल अर्थ का सन्निवेश करना भारवि की अपनी विशेषता रही है। मल्लिनाथ के शब्दों में ऐसे स्थल `नारिकेल फलसम्मित' है। यह 18 सर्गों में निबद्ध महाकवि भारवि का एकमात्र महाकाव्य है जिसमें कौरवों पर विजय प्राप्ति के लिए अर्जुन का हिमालय पर्वत पर जाकर तपस्या करना, किरातवेशधारी शिव से युद्ध और प्रसन्न शिव से पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है।