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Q: ‘‘कहा-कैकेयी ने सक्रोध दूर-हट! दूर अरी निर्बोध।’’ उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा रस है?
  • A. वात्सल्य रस
  • B. वीभत्स रस
  • C. हास्य रस
  • D. रौद्र रस
Correct Answer: Option D - ‘कहा-कैकेयी ने सक्रोध दूर-हट! दूर अरी निर्बोध।’ प्रश्नोक्त पंक्ति रौद्र रस का उदाहरण है। किसी विपक्षी, असभ्य अहितकारी शत्रु की धृष्ट चेष्टाओं और क्रियाओं से निजापमान अथवा अहित आदि के कारण हृदय में जो रोष होता है, उसे क्रोध कहते हैं। यही स्थायी भाव परिपक्व होकर रौद्र रस होता है। रक्त नेत्र, तनी हुई भौहें, क्रूर दृष्टि, हाथों का चलना, कठोर एवं कर्कश शब्द, स्वशक्ति कथन, शस्त्रास्त्र प्रहार, रोमांचादि इस रस के अनुभव है। उग्रता, गर्व, क्रूरता और अमर्ष आदि इसके संचारी भाव हैं।
D. ‘कहा-कैकेयी ने सक्रोध दूर-हट! दूर अरी निर्बोध।’ प्रश्नोक्त पंक्ति रौद्र रस का उदाहरण है। किसी विपक्षी, असभ्य अहितकारी शत्रु की धृष्ट चेष्टाओं और क्रियाओं से निजापमान अथवा अहित आदि के कारण हृदय में जो रोष होता है, उसे क्रोध कहते हैं। यही स्थायी भाव परिपक्व होकर रौद्र रस होता है। रक्त नेत्र, तनी हुई भौहें, क्रूर दृष्टि, हाथों का चलना, कठोर एवं कर्कश शब्द, स्वशक्ति कथन, शस्त्रास्त्र प्रहार, रोमांचादि इस रस के अनुभव है। उग्रता, गर्व, क्रूरता और अमर्ष आदि इसके संचारी भाव हैं।

Explanations:

‘कहा-कैकेयी ने सक्रोध दूर-हट! दूर अरी निर्बोध।’ प्रश्नोक्त पंक्ति रौद्र रस का उदाहरण है। किसी विपक्षी, असभ्य अहितकारी शत्रु की धृष्ट चेष्टाओं और क्रियाओं से निजापमान अथवा अहित आदि के कारण हृदय में जो रोष होता है, उसे क्रोध कहते हैं। यही स्थायी भाव परिपक्व होकर रौद्र रस होता है। रक्त नेत्र, तनी हुई भौहें, क्रूर दृष्टि, हाथों का चलना, कठोर एवं कर्कश शब्द, स्वशक्ति कथन, शस्त्रास्त्र प्रहार, रोमांचादि इस रस के अनुभव है। उग्रता, गर्व, क्रूरता और अमर्ष आदि इसके संचारी भाव हैं।