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Q: ``ज्वलति चलितेन्धनोग्निर्विप्रकृत: पन्नग: फणां कुरुते। प्राय: स्वमहिमानं क्षोभात् प्रतिपद्यते हि जन:।।'' यह श्लोक निम्नलिखित में किससे सम्बन्धित है?
  • A. मृच्छकटिकम्/शूद्रक
  • B. अभिज्ञानशाकुन्तलम्/मातलि
  • C. उत्तररामचरितम्/लव
  • D. किरातार्जुनीयम्/द्रौपदी
Correct Answer: Option B - प्रस्तुत श्लोक `अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक के छठवें अङ्क का 31वां श्लोक है। यह श्लोक मातलि से सम्बन्धित है। इसका तात्पर्य है, ``अग्नि लड़कियों को हिला देने से धधक उठती है। साँप छेड़ने पर फन फैलाता है (इसी प्रकार) तेजस्वी पुरुष उत्तेजना पाने पर प्राय: (अपना) तेज प्रकट करता है।''
B. प्रस्तुत श्लोक `अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक के छठवें अङ्क का 31वां श्लोक है। यह श्लोक मातलि से सम्बन्धित है। इसका तात्पर्य है, ``अग्नि लड़कियों को हिला देने से धधक उठती है। साँप छेड़ने पर फन फैलाता है (इसी प्रकार) तेजस्वी पुरुष उत्तेजना पाने पर प्राय: (अपना) तेज प्रकट करता है।''

Explanations:

प्रस्तुत श्लोक `अभिज्ञानशाकुन्तलम्' नाटक के छठवें अङ्क का 31वां श्लोक है। यह श्लोक मातलि से सम्बन्धित है। इसका तात्पर्य है, ``अग्नि लड़कियों को हिला देने से धधक उठती है। साँप छेड़ने पर फन फैलाता है (इसी प्रकार) तेजस्वी पुरुष उत्तेजना पाने पर प्राय: (अपना) तेज प्रकट करता है।''