Correct Answer:
Option C - जैन धर्म में कुल 24तीर्थंकर हुए हैं। तीर्थंकर जैन धर्म में उसके संस्थापक एवं जितेन्द्रिय तथा ज्ञान प्राप्त महात्माओं की उपाधि थी। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव एवं चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी थे। जैन महात्माओं को निग्र्रन्थ (बन्धनरहित) तथा जैन संस्थापकों को तीर्थंकर कहा गया। तीर्थंकर दो शब्दों ‘तीर्थ’ और ‘कर’ से मिलकर बना है। तीर्थ का अर्थ उन विविध नियमों से है जो मनुष्य को इस भवसागर से पार उतार दे। ऋग्वेद में ऋषभदेव और अरिष्टनेमि का उल्लेख मिलता है।
C. जैन धर्म में कुल 24तीर्थंकर हुए हैं। तीर्थंकर जैन धर्म में उसके संस्थापक एवं जितेन्द्रिय तथा ज्ञान प्राप्त महात्माओं की उपाधि थी। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव एवं चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी थे। जैन महात्माओं को निग्र्रन्थ (बन्धनरहित) तथा जैन संस्थापकों को तीर्थंकर कहा गया। तीर्थंकर दो शब्दों ‘तीर्थ’ और ‘कर’ से मिलकर बना है। तीर्थ का अर्थ उन विविध नियमों से है जो मनुष्य को इस भवसागर से पार उतार दे। ऋग्वेद में ऋषभदेव और अरिष्टनेमि का उल्लेख मिलता है।