Correct Answer:
Option B - खड़ी बोली हिन्दी का आधुनिक कालीन प्रथम महाकाव्य अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ कृत ‘प्रियप्रवास’ है। प्रियप्रवास पर हरिऔध को ‘मंगला प्रसाद पारितोषित’ सम्मान मिला। प्रियप्रवास में पहली बार राधा और कृष्ण अलौकिक रूप त्यागकर मानवीय रूप में उपस्थित हुए। गणपति चन्द्र गुप्त ने हरिऔध को ‘आधुनिक काल का सूरदास’ कहा है। साकेत और भारत-भारती राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कृति है। ‘कुरूक्षेत्र’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना है।
B. खड़ी बोली हिन्दी का आधुनिक कालीन प्रथम महाकाव्य अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ कृत ‘प्रियप्रवास’ है। प्रियप्रवास पर हरिऔध को ‘मंगला प्रसाद पारितोषित’ सम्मान मिला। प्रियप्रवास में पहली बार राधा और कृष्ण अलौकिक रूप त्यागकर मानवीय रूप में उपस्थित हुए। गणपति चन्द्र गुप्त ने हरिऔध को ‘आधुनिक काल का सूरदास’ कहा है। साकेत और भारत-भारती राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की कृति है। ‘कुरूक्षेत्र’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना है।