Correct Answer:
Option C - भरतमुनि द्वारा विरचित ग्रंथ का नाम ‘नाट्यशास्त्र’ है जिसमें नाटक के सभी पक्षों का विस्तृत विवेचन किया गया हैं इस ग्रंथ में 36 अध्याय तथा लगभग पाँच हजार श्लोक हैं। आचार्य भरतमुनि ने ‘नाट्यशास्त्र’ को पंचमवेद’ कहा है। जबकि ‘दशरूपक’ के रचयिता ‘धनंजय’ तथा ‘साहित्यदर्पण’ के रचयिता आचार्य विश्वनाथ हैं।
C. भरतमुनि द्वारा विरचित ग्रंथ का नाम ‘नाट्यशास्त्र’ है जिसमें नाटक के सभी पक्षों का विस्तृत विवेचन किया गया हैं इस ग्रंथ में 36 अध्याय तथा लगभग पाँच हजार श्लोक हैं। आचार्य भरतमुनि ने ‘नाट्यशास्त्र’ को पंचमवेद’ कहा है। जबकि ‘दशरूपक’ के रचयिता ‘धनंजय’ तथा ‘साहित्यदर्पण’ के रचयिता आचार्य विश्वनाथ हैं।