Explanations:
साम्राज्य विस्तार के बाद इल्तुतमिश ने उसे संगठित करने का प्रयास किया। उसने चालीस गुलाम सरदारों के गुट अर्थात तुर्कान-ए-चिहालगानी का गठन किया। इल्तुतमिश ने मुइज्जी तथा कुत्बी अमीरों के वर्चस्व से मुक्ति पाने के लिए तथा प्रशासनिक कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए नवीन शासक वर्ग का गठन किया जिसमें दो प्रमुख दल थे- (i) तुर्क दास (ii) ताजीक