Correct Answer:
Option C - मोहर-कुलॉम समीकरण (Mohr-Coulomb equation) –
इसकी निम्नलिखित मुख्य सीमायें हैं –
1. यह मध्यवर्ती मुख्य प्रतिबल के प्रभाव की उपेक्षा करता है।
2. यह एक सीधी रेखा द्वारा वक्रित विफलता आवरण का अनुमान लगाता है, जो सही परिणाम नहीं दे सकता है।
3. जब मोहर आवरण (Mohr-envelop) वक्रित होता है, तो विफलता तल की वास्तविक तिर्यकता अधिकतम तिर्यकता से थोड़ी कम होती है। इसलिए विफलता तल का पाया गया कोंण सही नहीं है।
4. कुछ चिकनी मृदा (Clayey soils) के लिए, विफलता के तल पर अभिलम्ब और अपरूपण प्रतिबलों के बीच कोई निश्चित संबंध नहीं है। ऐसी मृदा के लिए इस सिद्धांत का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
C. मोहर-कुलॉम समीकरण (Mohr-Coulomb equation) –
इसकी निम्नलिखित मुख्य सीमायें हैं –
1. यह मध्यवर्ती मुख्य प्रतिबल के प्रभाव की उपेक्षा करता है।
2. यह एक सीधी रेखा द्वारा वक्रित विफलता आवरण का अनुमान लगाता है, जो सही परिणाम नहीं दे सकता है।
3. जब मोहर आवरण (Mohr-envelop) वक्रित होता है, तो विफलता तल की वास्तविक तिर्यकता अधिकतम तिर्यकता से थोड़ी कम होती है। इसलिए विफलता तल का पाया गया कोंण सही नहीं है।
4. कुछ चिकनी मृदा (Clayey soils) के लिए, विफलता के तल पर अभिलम्ब और अपरूपण प्रतिबलों के बीच कोई निश्चित संबंध नहीं है। ऐसी मृदा के लिए इस सिद्धांत का उपयोग नहीं किया जा सकता है।