Correct Answer:
Option B - महाकवि माघ द्वारा रैवतक पर्वत की प्रात:कालीन सुषमा का वर्णन किया गया है। जिसमें यह प्रतीत होता है कि रैवतक उस गजेन्द्र की शोभा धारण कर रहा है जिसमें दोनों ओर दो उज्जवल घण्टे लटक रहे हों इसी कल्पना के कारण माघ को घंटा-माघ कहा गया है। संस्कृत में इन्हें ‘घण्टापथ’ की उपाधि से अभिहित किया गया।
B. महाकवि माघ द्वारा रैवतक पर्वत की प्रात:कालीन सुषमा का वर्णन किया गया है। जिसमें यह प्रतीत होता है कि रैवतक उस गजेन्द्र की शोभा धारण कर रहा है जिसमें दोनों ओर दो उज्जवल घण्टे लटक रहे हों इसी कल्पना के कारण माघ को घंटा-माघ कहा गया है। संस्कृत में इन्हें ‘घण्टापथ’ की उपाधि से अभिहित किया गया।