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Q: हृदय में मूल रूप से विद्यमान रहने वाले भावों को क्या संज्ञा दी जाती है?
  • A. अनुभाव
  • B. विभाव
  • C. स्थायी भाव
  • D. संचारी भाव
Correct Answer: Option C - हृदय में मूल रुप से विद्यमान रहने वाले भावों को ‘स्थायी भाव’ की संज्ञा दी जाती है। सर्वप्रथम आचार्य भरतमुनि ने 8 स्थायी भाव की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य ‘मम्मट’ और ‘अभिनव गुप्त’ ने एक और ‘निर्वेद’ नामक स्थायी भाव की चर्चा की। अत: इस कारण से रसों की कुल संख्या 9 मानी जाती है। रस एवं उनके स्थायीभाव इस प्रकार है– रस स्थायी भाव शृंगार रस रति हास्य रस हास रौद्र रस क्रोध करुण रस शोक वीभत्स रस जुगुप्सा भयानक रस भय वीर रस उत्साह अद्भुत रस विस्मय शांत रस निर्वेद
C. हृदय में मूल रुप से विद्यमान रहने वाले भावों को ‘स्थायी भाव’ की संज्ञा दी जाती है। सर्वप्रथम आचार्य भरतमुनि ने 8 स्थायी भाव की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य ‘मम्मट’ और ‘अभिनव गुप्त’ ने एक और ‘निर्वेद’ नामक स्थायी भाव की चर्चा की। अत: इस कारण से रसों की कुल संख्या 9 मानी जाती है। रस एवं उनके स्थायीभाव इस प्रकार है– रस स्थायी भाव शृंगार रस रति हास्य रस हास रौद्र रस क्रोध करुण रस शोक वीभत्स रस जुगुप्सा भयानक रस भय वीर रस उत्साह अद्भुत रस विस्मय शांत रस निर्वेद

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हृदय में मूल रुप से विद्यमान रहने वाले भावों को ‘स्थायी भाव’ की संज्ञा दी जाती है। सर्वप्रथम आचार्य भरतमुनि ने 8 स्थायी भाव की चर्चा की थी किन्तु परवर्ती आचार्य ‘मम्मट’ और ‘अभिनव गुप्त’ ने एक और ‘निर्वेद’ नामक स्थायी भाव की चर्चा की। अत: इस कारण से रसों की कुल संख्या 9 मानी जाती है। रस एवं उनके स्थायीभाव इस प्रकार है– रस स्थायी भाव शृंगार रस रति हास्य रस हास रौद्र रस क्रोध करुण रस शोक वीभत्स रस जुगुप्सा भयानक रस भय वीर रस उत्साह अद्भुत रस विस्मय शांत रस निर्वेद