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Q: कोशिका का शक्ति-स्रोत होता है
  • A. कोशिका भित्ति
  • B. माइटोकॉन्ड्रिया
  • C. राइबोसोम
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option B - जीवाणु एवं नील हरित शैवाल को छोड़कर शेष सभी सजीव पादप एवं जन्तु कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में अनियमित रूप से बिखरे हुए द्वीप-एकक पर्दायुक्त कोशिकाओं (organelle) को सूत्रकणिका या माइटोकॉण्ड्रिया कहते हैं। श्वसन की क्रिया प्रत्येक जीवित कोशिका के कोशिका द्रव्य (साइटोप्लाज्म) एवं माइटोकाण्ड्रिया में सम्पन्न होती है। श्वसन से सम्बन्धित प्रारम्भिक क्रियाएं साइटोप्लाज्म में होती हैं तथा शेष क्रियाएं माइटोकाण्ड्रिया में होती हैं। चूंकि क्रिया के अंतिम चरण में ही अधिकांश ऊर्जा उत्पन्न होती है जो ATP के रूप में संचित रहती है। अत: माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का श्वसनांग अथवा ‘ऊर्जा घर’ कहते हैं।
B. जीवाणु एवं नील हरित शैवाल को छोड़कर शेष सभी सजीव पादप एवं जन्तु कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में अनियमित रूप से बिखरे हुए द्वीप-एकक पर्दायुक्त कोशिकाओं (organelle) को सूत्रकणिका या माइटोकॉण्ड्रिया कहते हैं। श्वसन की क्रिया प्रत्येक जीवित कोशिका के कोशिका द्रव्य (साइटोप्लाज्म) एवं माइटोकाण्ड्रिया में सम्पन्न होती है। श्वसन से सम्बन्धित प्रारम्भिक क्रियाएं साइटोप्लाज्म में होती हैं तथा शेष क्रियाएं माइटोकाण्ड्रिया में होती हैं। चूंकि क्रिया के अंतिम चरण में ही अधिकांश ऊर्जा उत्पन्न होती है जो ATP के रूप में संचित रहती है। अत: माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का श्वसनांग अथवा ‘ऊर्जा घर’ कहते हैं।

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जीवाणु एवं नील हरित शैवाल को छोड़कर शेष सभी सजीव पादप एवं जन्तु कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में अनियमित रूप से बिखरे हुए द्वीप-एकक पर्दायुक्त कोशिकाओं (organelle) को सूत्रकणिका या माइटोकॉण्ड्रिया कहते हैं। श्वसन की क्रिया प्रत्येक जीवित कोशिका के कोशिका द्रव्य (साइटोप्लाज्म) एवं माइटोकाण्ड्रिया में सम्पन्न होती है। श्वसन से सम्बन्धित प्रारम्भिक क्रियाएं साइटोप्लाज्म में होती हैं तथा शेष क्रियाएं माइटोकाण्ड्रिया में होती हैं। चूंकि क्रिया के अंतिम चरण में ही अधिकांश ऊर्जा उत्पन्न होती है जो ATP के रूप में संचित रहती है। अत: माइटोकाण्ड्रिया को कोशिका का श्वसनांग अथवा ‘ऊर्जा घर’ कहते हैं।