Correct Answer:
Option C - किरातार्जुनीयम् प्रथम सर्ग के चौथे श्लोक में वनेचर ने युधिष्ठिर से कहा कि हे राजन्! ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:’ अर्थात् हितकर और प्रिय वचन (वाणी) दुर्लभ होते हैं।
C. किरातार्जुनीयम् प्रथम सर्ग के चौथे श्लोक में वनेचर ने युधिष्ठिर से कहा कि हे राजन्! ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:’ अर्थात् हितकर और प्रिय वचन (वाणी) दुर्लभ होते हैं।
Explanations:
किरातार्जुनीयम् प्रथम सर्ग के चौथे श्लोक में वनेचर ने युधिष्ठिर से कहा कि हे राजन्! ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वच:’ अर्थात् हितकर और प्रिय वचन (वाणी) दुर्लभ होते हैं।
Download Our App
Download our app to know more Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipisicing elit.
Excepturi, esse.
YOU ARE NOT LOGIN
Unlocking possibilities: Login required for a world of personalized
experiences.