Explanations:
लारेंस कोहलबर्ग के सिद्धान्त के अनुसार, अरूणिमा नैतिक विकास की अनुबंध की नैतिकता, व्यक्तिगत अधिकार और लोकतांत्रिक रूप से स्वीकृत कानून की पाँचवी अवस्था हैं। इसमें वे समाज के भीतर सहमत कानूनों के प्रति दायित्व की भावना के कारण वही करते है जो सही है। वे समझते है कि कानूनो को एक अंतर्निहित सामाजिक अनुबंध में परिवर्तन के हिस्से के रूप में संशोधित किया जा सकता है।