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Q: ‘गौर्जल्पति’ इतीदम् उदाहरणं कस्या: लक्षणाया: निदर्शकम्?
  • A. प्रयोजनवती गौणीसाध्यवसानालक्षण लक्षणाया:
  • B. प्रयोजनवती गौणीसारोपालक्षणलक्षणाया:
  • C. रूढिमती शुद्धासारोपालक्षणलक्षणाया:
  • D. रूढिमती शुद्धासाध्यवसानालक्षणलक्षणाया:
Correct Answer: Option A - ‘गौर्जल्पति’ इतीदम् उदाहरणं प्रयोजनवती गौणीसाध्यवसानालक्षण लक्षणाया: निदर्शकम्- फिर उपर्युक्त के 8 गूढ़प्रयोजनवती, 8 अगूढ़प्रयोजनवती मिलाकर 16, फिर इनके धर्मीगत प्रयोजनवती 16, धर्मगत प्रयोजनवती 16 इस प्रकार प्रयोजनवती लक्षणा: के 32 भेद हैं। रूढिमति लक्षणा 8, प्रयोजनवती 32 मिलाकर लक्षणा के 40 भेद हैं। पुन: उस लक्षणा के पदगत 40, वाक्यगत 40 मिलाकर 80 प्रकार की लक्षणा होती है। इस प्रकार आचार्य विश्वनाथ के अनुसार लक्षणा के 80 भेद हैं।
A. ‘गौर्जल्पति’ इतीदम् उदाहरणं प्रयोजनवती गौणीसाध्यवसानालक्षण लक्षणाया: निदर्शकम्- फिर उपर्युक्त के 8 गूढ़प्रयोजनवती, 8 अगूढ़प्रयोजनवती मिलाकर 16, फिर इनके धर्मीगत प्रयोजनवती 16, धर्मगत प्रयोजनवती 16 इस प्रकार प्रयोजनवती लक्षणा: के 32 भेद हैं। रूढिमति लक्षणा 8, प्रयोजनवती 32 मिलाकर लक्षणा के 40 भेद हैं। पुन: उस लक्षणा के पदगत 40, वाक्यगत 40 मिलाकर 80 प्रकार की लक्षणा होती है। इस प्रकार आचार्य विश्वनाथ के अनुसार लक्षणा के 80 भेद हैं।

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‘गौर्जल्पति’ इतीदम् उदाहरणं प्रयोजनवती गौणीसाध्यवसानालक्षण लक्षणाया: निदर्शकम्- फिर उपर्युक्त के 8 गूढ़प्रयोजनवती, 8 अगूढ़प्रयोजनवती मिलाकर 16, फिर इनके धर्मीगत प्रयोजनवती 16, धर्मगत प्रयोजनवती 16 इस प्रकार प्रयोजनवती लक्षणा: के 32 भेद हैं। रूढिमति लक्षणा 8, प्रयोजनवती 32 मिलाकर लक्षणा के 40 भेद हैं। पुन: उस लक्षणा के पदगत 40, वाक्यगत 40 मिलाकर 80 प्रकार की लक्षणा होती है। इस प्रकार आचार्य विश्वनाथ के अनुसार लक्षणा के 80 भेद हैं।