Correct Answer:
Option C - प्रिज्मी दिक्सूचक (prismatic compass):-
∎ प्रिज्मी दिक्सूचक 80mm से 150mm व्यास के पीतल का गोल बक्सा होता है जिसके मध्य में कीलक के ऊपर चुम्बकीय सुई टंगी रहती है, जो सदा चुम्बकीय याम्योत्तर दर्शाती है।
∎ प्रिज्मी दिक्सूचक में दिक्सूचक पूर्ण वृत्त प्रणाली में पढ़े जाते हैं।
∎ एगेट टोपी (Agate Cap) प्रिज्मी दिक्सूचक में होता है।
∎ चुम्बकीय सुई चौड़ी पट्टी की बनी होती है अत: यह संकेतक का काम नहीं करती है।
∎ अशांकित चक्री बक्शे से न जुड़ी होकर चुम्बकीय सुई के साथ जुड़ी रहती है और बेधिका के साथ नहीं घूमती है।
∎ लक्ष्य बेधन तथा पठन दोनों कार्य एक साथ किया जाता है।
C. प्रिज्मी दिक्सूचक (prismatic compass):-
∎ प्रिज्मी दिक्सूचक 80mm से 150mm व्यास के पीतल का गोल बक्सा होता है जिसके मध्य में कीलक के ऊपर चुम्बकीय सुई टंगी रहती है, जो सदा चुम्बकीय याम्योत्तर दर्शाती है।
∎ प्रिज्मी दिक्सूचक में दिक्सूचक पूर्ण वृत्त प्रणाली में पढ़े जाते हैं।
∎ एगेट टोपी (Agate Cap) प्रिज्मी दिक्सूचक में होता है।
∎ चुम्बकीय सुई चौड़ी पट्टी की बनी होती है अत: यह संकेतक का काम नहीं करती है।
∎ अशांकित चक्री बक्शे से न जुड़ी होकर चुम्बकीय सुई के साथ जुड़ी रहती है और बेधिका के साथ नहीं घूमती है।
∎ लक्ष्य बेधन तथा पठन दोनों कार्य एक साथ किया जाता है।