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Q: Which of the following is correct about the Fundamental Rights in India? निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में मूल अधिकारों के बारे में सही है?
  • A. They are the unique declaration of balance between the Constitutional supremacy and the authority of Legislature . /वे संवैधानिक सर्वोच्चता तथा विधायिका की सत्ता के मध्य सन्तुलन की अद्वितीय घोषणा है।
  • B. They create a balance between the rights of people and the security of nation. / वे लोगों के अधिकारों तथा देश की सुरक्षा के मध्य सन्तुलन का निर्माण करते है।
  • C. They not only decide the political and legal equality, but the social equality also . / वे न केवल राजनीति एवं कानूनी समानता, बल्कि सामाजिक समानता का भी निर्णय करते है।
  • D. More than one of the above उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. None of the above /उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option D - भारत में मूल अधिकारों के बारे में दिए गए प्रश्न में एक अधिक विकल्प सत्य हैं क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14-32 के तहत, भारतीय नागरिकों को छ: मौलिक अधिकार दिये गए हैं। सामान्य कानूनी अधिकारों के विपरीत मौलिक अधिकारों को देश के संविधान द्वारा गांरटी एवं सुरक्षा प्रदान की गई है। ये संवैधानिक सर्वोच्चता तथा विधायिका की सत्ता के मध्य सन्तुलन की अद्वितीय घोषणा है। ये न केवल राजनीतिक एवं कानूनी समानता, बल्कि सामाजिक समानता का भी निर्णय करते हैं।
D. भारत में मूल अधिकारों के बारे में दिए गए प्रश्न में एक अधिक विकल्प सत्य हैं क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14-32 के तहत, भारतीय नागरिकों को छ: मौलिक अधिकार दिये गए हैं। सामान्य कानूनी अधिकारों के विपरीत मौलिक अधिकारों को देश के संविधान द्वारा गांरटी एवं सुरक्षा प्रदान की गई है। ये संवैधानिक सर्वोच्चता तथा विधायिका की सत्ता के मध्य सन्तुलन की अद्वितीय घोषणा है। ये न केवल राजनीतिक एवं कानूनी समानता, बल्कि सामाजिक समानता का भी निर्णय करते हैं।

Explanations:

भारत में मूल अधिकारों के बारे में दिए गए प्रश्न में एक अधिक विकल्प सत्य हैं क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14-32 के तहत, भारतीय नागरिकों को छ: मौलिक अधिकार दिये गए हैं। सामान्य कानूनी अधिकारों के विपरीत मौलिक अधिकारों को देश के संविधान द्वारा गांरटी एवं सुरक्षा प्रदान की गई है। ये संवैधानिक सर्वोच्चता तथा विधायिका की सत्ता के मध्य सन्तुलन की अद्वितीय घोषणा है। ये न केवल राजनीतिक एवं कानूनी समानता, बल्कि सामाजिक समानता का भी निर्णय करते हैं।