Explanations:
उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्द्धों में 30⁰ से 35⁰ अक्षांशों के बीच उपोष्ण उच्च दाब कटिबंध पाया जाता है, जिसे अश्व अक्षांश कहा जाता है। इस पेटी का उच्च वायुदाब तापमान से सम्बन्धित न होकर पृथ्वी की दैनिक गति एवं वायु के अवतलन से सम्बन्धित है। इस पेटी में वायु अवतलन के कारण वायुमण्डल में स्थिरता आ जाती है जिससे पवन संचार बहुत कम हो पाता है। प्राचीन काल में घोड़े से लदे जलयानों के संचालन में पर्याप्त कठिनाई होती थी परिणामस्वरूप व्यापारी जलयानों को हल्का करने हेतु कुछ अश्वों को सागर में फेक देते थे। इसी कारण से इन्हें अश्व अक्षांश कहा जाने लगा।