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Q: ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ के लेखक हैं –
  • A. यशपाल
  • B. नागार्जन
  • C. गजानन माधव मुक्तिबोध
  • D. अमृतराय
Correct Answer: Option C - ‘‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’’ काव्यकृति के रचयिता गजानन माधव मुक्तिबोध हैं। इनकी एक अन्य काव्यकृति ‘भूरि-भूरि खाक धूल’ है। अँधेरे में, ब्रह्म राक्षस, तथा भूलगलती इनकी प्रमुख कविताएँ हैं। नागार्जुन के प्रमुख काव्य संग्रह - युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आँखें, भस्मांकुर, तालाब की मछलियाँ, खिचड़ी, विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार-हजार बाँहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस आदि हैं। जबकि यशपाल एवं अमृतराय गद्य लेखक हैं।
C. ‘‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’’ काव्यकृति के रचयिता गजानन माधव मुक्तिबोध हैं। इनकी एक अन्य काव्यकृति ‘भूरि-भूरि खाक धूल’ है। अँधेरे में, ब्रह्म राक्षस, तथा भूलगलती इनकी प्रमुख कविताएँ हैं। नागार्जुन के प्रमुख काव्य संग्रह - युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आँखें, भस्मांकुर, तालाब की मछलियाँ, खिचड़ी, विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार-हजार बाँहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस आदि हैं। जबकि यशपाल एवं अमृतराय गद्य लेखक हैं।

Explanations:

‘‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’’ काव्यकृति के रचयिता गजानन माधव मुक्तिबोध हैं। इनकी एक अन्य काव्यकृति ‘भूरि-भूरि खाक धूल’ है। अँधेरे में, ब्रह्म राक्षस, तथा भूलगलती इनकी प्रमुख कविताएँ हैं। नागार्जुन के प्रमुख काव्य संग्रह - युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आँखें, भस्मांकुर, तालाब की मछलियाँ, खिचड़ी, विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार-हजार बाँहों वाली, पुरानी जूतियों का कोरस आदि हैं। जबकि यशपाल एवं अमृतराय गद्य लेखक हैं।