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Q: ‘चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।’ में कौन-सा अलंकार है ?
  • A. रूपक
  • B. उत्प्रेक्षा
  • C. यमक
  • D. श्लेष
Correct Answer: Option D - ‘चिरजीवौं जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।’ उक्त पंक्ति में ‘श्लेष अलंकार’ है। यहाँ वृषभानुजा और हलधर शब्द के दो-दो अर्थ हैं। वृषभानुजा – वृषभानु की पुत्री ‘राधा’ – वृषभ की अनुजा ‘गाय’ हलधर – ‘बलराम’ – हल को धारण करने वाला ‘बैल’ जहाँ कोई एक शब्द एक बार ही प्रयोग होता है, किंतु उसके अर्थ एक से अधिक होते हैं वहाँ श्लेष अलंकार होता है। श्लेष का अर्थ है–चिपका, अर्थात एक शब्द के साथ दो या दो से अधिक अर्थ चिपके हुए होते हैं।
D. ‘चिरजीवौं जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।’ उक्त पंक्ति में ‘श्लेष अलंकार’ है। यहाँ वृषभानुजा और हलधर शब्द के दो-दो अर्थ हैं। वृषभानुजा – वृषभानु की पुत्री ‘राधा’ – वृषभ की अनुजा ‘गाय’ हलधर – ‘बलराम’ – हल को धारण करने वाला ‘बैल’ जहाँ कोई एक शब्द एक बार ही प्रयोग होता है, किंतु उसके अर्थ एक से अधिक होते हैं वहाँ श्लेष अलंकार होता है। श्लेष का अर्थ है–चिपका, अर्थात एक शब्द के साथ दो या दो से अधिक अर्थ चिपके हुए होते हैं।

Explanations:

‘चिरजीवौं जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।’ उक्त पंक्ति में ‘श्लेष अलंकार’ है। यहाँ वृषभानुजा और हलधर शब्द के दो-दो अर्थ हैं। वृषभानुजा – वृषभानु की पुत्री ‘राधा’ – वृषभ की अनुजा ‘गाय’ हलधर – ‘बलराम’ – हल को धारण करने वाला ‘बैल’ जहाँ कोई एक शब्द एक बार ही प्रयोग होता है, किंतु उसके अर्थ एक से अधिक होते हैं वहाँ श्लेष अलंकार होता है। श्लेष का अर्थ है–चिपका, अर्थात एक शब्द के साथ दो या दो से अधिक अर्थ चिपके हुए होते हैं।