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Q: बर्हिविकारं प्रकृते: पृथग् विदु: पुरातनं त्वां पुरुषं पुराविद:। यह पद्यांश उद्धृत है
  • A. सांख्यकारिका से
  • B. शिशुपालवध से
  • C. नलचम्पू से
  • D. मृच्छकटिक से
Correct Answer: Option B - बहिर्विकारं प्रकृते: पृथग् विदु: पुरातनं त्वां पुरुषं पुराविद:। अर्थात् - विकारों से परे मूल प्रकृति से पृथक्, अनादि और परमपुरुष मानते हैं। यह पद्य शिशुपालवद्य के प्रथम सर्ग के 33 वाँ श्लोक से लिया गया है। यह नारद जी की उक्ति है।
B. बहिर्विकारं प्रकृते: पृथग् विदु: पुरातनं त्वां पुरुषं पुराविद:। अर्थात् - विकारों से परे मूल प्रकृति से पृथक्, अनादि और परमपुरुष मानते हैं। यह पद्य शिशुपालवद्य के प्रथम सर्ग के 33 वाँ श्लोक से लिया गया है। यह नारद जी की उक्ति है।

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बहिर्विकारं प्रकृते: पृथग् विदु: पुरातनं त्वां पुरुषं पुराविद:। अर्थात् - विकारों से परे मूल प्रकृति से पृथक्, अनादि और परमपुरुष मानते हैं। यह पद्य शिशुपालवद्य के प्रथम सर्ग के 33 वाँ श्लोक से लिया गया है। यह नारद जी की उक्ति है।