Correct Answer:
Option C - भाषा-शिक्षणस्य सम्प्रेषणात्मकविधि: छात्रान् तथा भाषया परस्परम् अन्त: क्रियार्थम प्रेरयति।
तात्पर्य है – भाषा शिक्षण विधि शिक्षक द्वारा सूचनाओं, तथ्यों एवं विचारों को छात्रों तक भाषा की सहायता से प्रेषित करता है। सम्प्रेषण का अर्थ है संदेश प्राप्त करने वाला, संदेश को उसी अर्थ में लें जिस अर्थ में वह उसके पास भेजा गया है, इसका ज्ञान तभी सम्भव है जब वह अपनी प्रतिक्रिया भी साथ-साथ व्यक्त करे। इस प्रकार का सिद्धान्त अन्त:क्रिया (अर्न्तमन में चलने वाली क्रिया) को महत्व देता है। सम्प्रेषणात्मक विधि आन्तरिक क्रिया को प्रेरित करता है ना कि व्याकरण-अनुवाद विधि, यह विधि भाषा ज्ञान का बोध कराती है। अनुवाद विधि भी भाषा ज्ञान में मदद करती है। अनौपचारिक विधि जो ज्ञान का वर्धन करती है ना कि आन्तरिक क्रियाओं को मदद प्रदान करती है।
C. भाषा-शिक्षणस्य सम्प्रेषणात्मकविधि: छात्रान् तथा भाषया परस्परम् अन्त: क्रियार्थम प्रेरयति।
तात्पर्य है – भाषा शिक्षण विधि शिक्षक द्वारा सूचनाओं, तथ्यों एवं विचारों को छात्रों तक भाषा की सहायता से प्रेषित करता है। सम्प्रेषण का अर्थ है संदेश प्राप्त करने वाला, संदेश को उसी अर्थ में लें जिस अर्थ में वह उसके पास भेजा गया है, इसका ज्ञान तभी सम्भव है जब वह अपनी प्रतिक्रिया भी साथ-साथ व्यक्त करे। इस प्रकार का सिद्धान्त अन्त:क्रिया (अर्न्तमन में चलने वाली क्रिया) को महत्व देता है। सम्प्रेषणात्मक विधि आन्तरिक क्रिया को प्रेरित करता है ना कि व्याकरण-अनुवाद विधि, यह विधि भाषा ज्ञान का बोध कराती है। अनुवाद विधि भी भाषा ज्ञान में मदद करती है। अनौपचारिक विधि जो ज्ञान का वर्धन करती है ना कि आन्तरिक क्रियाओं को मदद प्रदान करती है।