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Q: .
  • A. B, E, C, A, D
  • B. C, E, B, D, A
  • C. C, B, E, D, A
  • D. B, C, E, A, D
Correct Answer: Option B - ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ में आई पंक्तियों को पहले से बाद का क्रम निम्न है – 1. यद्यपि बाणभट्ट नाम से ही मेरी प्रसिद्धि है; पर यह मेरा वास्तविक नाम नहीं है। 2. भावी जीवन की रंगीन कल्पनाओं में डूबते-उतराते मनुष्य को आस-पास देखने की फुर्सत कहाँ होती है। 3. निपुणिका आंगन के बाहर मेरी प्रतीक्षा कर रही थी। उसकी सखी बनकर मैं जब बाहर आया, तो ....... 4. निपुणिका ने अपनी स्वामिनी को छिपा रखने के लिए जिस स्थान को चुना था, उसके दर्शन-मात्र से मेरा हृदय बैठ गया। 5. बिहार से जब मैं बाहर निकला, तो चित्त प्रसन्न था। आती बार मैंने रास्ते की ओर दृष्टि ही नहीं दी थी। ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ उपन्यास के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। इसका प्रकाशन 1946 ई. में हुआ था। यह एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं – बाणभट्ट, भट्टिनी, निपुणिका (निउनिया) आदि।
B. ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ में आई पंक्तियों को पहले से बाद का क्रम निम्न है – 1. यद्यपि बाणभट्ट नाम से ही मेरी प्रसिद्धि है; पर यह मेरा वास्तविक नाम नहीं है। 2. भावी जीवन की रंगीन कल्पनाओं में डूबते-उतराते मनुष्य को आस-पास देखने की फुर्सत कहाँ होती है। 3. निपुणिका आंगन के बाहर मेरी प्रतीक्षा कर रही थी। उसकी सखी बनकर मैं जब बाहर आया, तो ....... 4. निपुणिका ने अपनी स्वामिनी को छिपा रखने के लिए जिस स्थान को चुना था, उसके दर्शन-मात्र से मेरा हृदय बैठ गया। 5. बिहार से जब मैं बाहर निकला, तो चित्त प्रसन्न था। आती बार मैंने रास्ते की ओर दृष्टि ही नहीं दी थी। ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ उपन्यास के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। इसका प्रकाशन 1946 ई. में हुआ था। यह एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं – बाणभट्ट, भट्टिनी, निपुणिका (निउनिया) आदि।

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‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ में आई पंक्तियों को पहले से बाद का क्रम निम्न है – 1. यद्यपि बाणभट्ट नाम से ही मेरी प्रसिद्धि है; पर यह मेरा वास्तविक नाम नहीं है। 2. भावी जीवन की रंगीन कल्पनाओं में डूबते-उतराते मनुष्य को आस-पास देखने की फुर्सत कहाँ होती है। 3. निपुणिका आंगन के बाहर मेरी प्रतीक्षा कर रही थी। उसकी सखी बनकर मैं जब बाहर आया, तो ....... 4. निपुणिका ने अपनी स्वामिनी को छिपा रखने के लिए जिस स्थान को चुना था, उसके दर्शन-मात्र से मेरा हृदय बैठ गया। 5. बिहार से जब मैं बाहर निकला, तो चित्त प्रसन्न था। आती बार मैंने रास्ते की ओर दृष्टि ही नहीं दी थी। ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ उपन्यास के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। इसका प्रकाशन 1946 ई. में हुआ था। यह एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं – बाणभट्ट, भट्टिनी, निपुणिका (निउनिया) आदि।