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Q: As per IS : 712 – 1984, the lime used for structural purposes (for making mortar and concrete for construction and foundation works) having an initial setting time of 2 hours (minimum) and final setting time of 48 hours (maximum) is : IS : 712 – 1984 के अनुसार, संरचनात्मक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाने वाला चूना (निर्माण और नींव कार्यों के लिए मोर्टार और कंक्रीट बनाने के लिए) प्रारम्भिक जमाव काल 2 घंटे (न्यूनतम) और अन्तिम जमाव काल 48 घंटे (अधिकतम) होता है–
  • A. Class D - Magnesium/Dolomitic lime क्लास D - मैग्नीशियम/डोलोमिटीक चूना
  • B. Class C - Fat lime/क्लास C - फैट चूना
  • C. Class A - Eminently hydraulic lime क्लास A -उच्च जलीय चूना
  • D. Class F - Siliceous Dolomitic lime क्लास F- सिलिसियस डोलोमाइट चूना
Correct Answer: Option C - भारतीय मानक ब्यूरो ने IS : 712 – 1984 में चूने का निम्न प्रकार से वर्गीकरण किया है– श्रेणी A (Class A)– उच्च जलीय चूना (Eminently hydraulic lime)– इसे जल पका चूना भी कहते हैं। इस चूना में कैल्शियम ऑक्साइड 60-70% और मृत्तिका 30% होती है। इस चूने का उपयोग जलीय संरचनाओं के लिये किया जा सकता है। इसकी 28 दिन पर सम्पीडन सामर्थ्य 28kg/cm² होनी चाहिए। जमाव काल, प्रारम्भिक 2 घण्टे और अन्तिम 48 घण्टे लिया जाता है। इसका रंग भूरा (Grey) होता है। श्रेणी B (Class B) : अर्ध जलीय चूना (Semi-hydraulic lime)– इसे अर्ध जलपका चूना भी कहते हैं। इस चूना में 60% तक कैल्शियम ऑक्साइड और 15% तक मृत्तिका होती है। इसका उपयोग चिनाई मसाले तथा चूना-कंक्रीट के लिये किया जाता है। इस चूने की 28 दिन पर सम्पीडन सामर्थ्य 17.5 kg/cm² ली जाती है। श्रेणी C (Class C) : शुद्ध चूना या फैट चूना (Fat lime)– इस चूना में 85% कैल्शियम ऑक्साइड और 5.7% मृत्तिका होती है। यह शीघ्र बुझता है और बुझने पर आयतन 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। इस चूने का प्रयोग सफेदी, प्लास्टर तथा पोजोलाना पदार्थ–राखी, बालू आदि के साथ मिलकर चिनाई-मसाला बनाने के लिए किया जा सकता है। इस चूना का रंग सफेद होता है। श्रेणी D (Class D) : मैग्निशियम चूना (Magnesium lime)– यह चूना सफेद रंग का होता है। इसमें 85% कैल्शियम व मैग्निशियम होता है। यह शीघ्र बुझता है परन्तु देर से सैट होता है। यह चूना सफेदी तथा प्लास्तर कार्यों के फिनिशिंग कोट में प्रयोग किया जा सकता है। श्रेणीE (Class E) : कंकड़ चूना (Kankar lime)– इस चूना में 20% कैल्शियम ऑक्साइड, 5% मैग्निशियम और शेष अशुद्धियाँ होती है। यह देर से बुझता और सैट होता है। इसका उपयोग चिनाई मसाला तथा चूना कंक्रीट के लिये किया जाता है। श्रेणी A का चूना बुझा हुआ लेना चाहिए, जबकि श्रेणी B व C के चूने बुझे अथवा अनबुझे दोनों स्थितियों में प्राप्त किये जा सकते हैं। बुझा चूना पाउडर के रूप में होना चाहिये। श्रेणी F (Class F) - प्लास्टर के अण्डर कोट और परिष्करण कोट के लिए उपयोग किया जाता है।
C. भारतीय मानक ब्यूरो ने IS : 712 – 1984 में चूने का निम्न प्रकार से वर्गीकरण किया है– श्रेणी A (Class A)– उच्च जलीय चूना (Eminently hydraulic lime)– इसे जल पका चूना भी कहते हैं। इस चूना में कैल्शियम ऑक्साइड 60-70% और मृत्तिका 30% होती है। इस चूने का उपयोग जलीय संरचनाओं के लिये किया जा सकता है। इसकी 28 दिन पर सम्पीडन सामर्थ्य 28kg/cm² होनी चाहिए। जमाव काल, प्रारम्भिक 2 घण्टे और अन्तिम 48 घण्टे लिया जाता है। इसका रंग भूरा (Grey) होता है। श्रेणी B (Class B) : अर्ध जलीय चूना (Semi-hydraulic lime)– इसे अर्ध जलपका चूना भी कहते हैं। इस चूना में 60% तक कैल्शियम ऑक्साइड और 15% तक मृत्तिका होती है। इसका उपयोग चिनाई मसाले तथा चूना-कंक्रीट के लिये किया जाता है। इस चूने की 28 दिन पर सम्पीडन सामर्थ्य 17.5 kg/cm² ली जाती है। श्रेणी C (Class C) : शुद्ध चूना या फैट चूना (Fat lime)– इस चूना में 85% कैल्शियम ऑक्साइड और 5.7% मृत्तिका होती है। यह शीघ्र बुझता है और बुझने पर आयतन 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। इस चूने का प्रयोग सफेदी, प्लास्टर तथा पोजोलाना पदार्थ–राखी, बालू आदि के साथ मिलकर चिनाई-मसाला बनाने के लिए किया जा सकता है। इस चूना का रंग सफेद होता है। श्रेणी D (Class D) : मैग्निशियम चूना (Magnesium lime)– यह चूना सफेद रंग का होता है। इसमें 85% कैल्शियम व मैग्निशियम होता है। यह शीघ्र बुझता है परन्तु देर से सैट होता है। यह चूना सफेदी तथा प्लास्तर कार्यों के फिनिशिंग कोट में प्रयोग किया जा सकता है। श्रेणीE (Class E) : कंकड़ चूना (Kankar lime)– इस चूना में 20% कैल्शियम ऑक्साइड, 5% मैग्निशियम और शेष अशुद्धियाँ होती है। यह देर से बुझता और सैट होता है। इसका उपयोग चिनाई मसाला तथा चूना कंक्रीट के लिये किया जाता है। श्रेणी A का चूना बुझा हुआ लेना चाहिए, जबकि श्रेणी B व C के चूने बुझे अथवा अनबुझे दोनों स्थितियों में प्राप्त किये जा सकते हैं। बुझा चूना पाउडर के रूप में होना चाहिये। श्रेणी F (Class F) - प्लास्टर के अण्डर कोट और परिष्करण कोट के लिए उपयोग किया जाता है।

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भारतीय मानक ब्यूरो ने IS : 712 – 1984 में चूने का निम्न प्रकार से वर्गीकरण किया है– श्रेणी A (Class A)– उच्च जलीय चूना (Eminently hydraulic lime)– इसे जल पका चूना भी कहते हैं। इस चूना में कैल्शियम ऑक्साइड 60-70% और मृत्तिका 30% होती है। इस चूने का उपयोग जलीय संरचनाओं के लिये किया जा सकता है। इसकी 28 दिन पर सम्पीडन सामर्थ्य 28kg/cm² होनी चाहिए। जमाव काल, प्रारम्भिक 2 घण्टे और अन्तिम 48 घण्टे लिया जाता है। इसका रंग भूरा (Grey) होता है। श्रेणी B (Class B) : अर्ध जलीय चूना (Semi-hydraulic lime)– इसे अर्ध जलपका चूना भी कहते हैं। इस चूना में 60% तक कैल्शियम ऑक्साइड और 15% तक मृत्तिका होती है। इसका उपयोग चिनाई मसाले तथा चूना-कंक्रीट के लिये किया जाता है। इस चूने की 28 दिन पर सम्पीडन सामर्थ्य 17.5 kg/cm² ली जाती है। श्रेणी C (Class C) : शुद्ध चूना या फैट चूना (Fat lime)– इस चूना में 85% कैल्शियम ऑक्साइड और 5.7% मृत्तिका होती है। यह शीघ्र बुझता है और बुझने पर आयतन 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। इस चूने का प्रयोग सफेदी, प्लास्टर तथा पोजोलाना पदार्थ–राखी, बालू आदि के साथ मिलकर चिनाई-मसाला बनाने के लिए किया जा सकता है। इस चूना का रंग सफेद होता है। श्रेणी D (Class D) : मैग्निशियम चूना (Magnesium lime)– यह चूना सफेद रंग का होता है। इसमें 85% कैल्शियम व मैग्निशियम होता है। यह शीघ्र बुझता है परन्तु देर से सैट होता है। यह चूना सफेदी तथा प्लास्तर कार्यों के फिनिशिंग कोट में प्रयोग किया जा सकता है। श्रेणीE (Class E) : कंकड़ चूना (Kankar lime)– इस चूना में 20% कैल्शियम ऑक्साइड, 5% मैग्निशियम और शेष अशुद्धियाँ होती है। यह देर से बुझता और सैट होता है। इसका उपयोग चिनाई मसाला तथा चूना कंक्रीट के लिये किया जाता है। श्रेणी A का चूना बुझा हुआ लेना चाहिए, जबकि श्रेणी B व C के चूने बुझे अथवा अनबुझे दोनों स्थितियों में प्राप्त किये जा सकते हैं। बुझा चूना पाउडर के रूप में होना चाहिये। श्रेणी F (Class F) - प्लास्टर के अण्डर कोट और परिष्करण कोट के लिए उपयोग किया जाता है।