Q: ‘छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति’ यह सूक्ति कहाँ लिखित है?
A.
रत्नावली में
B.
अभिज्ञानशाकुन्तल में
C.
मृच्छकटिक में
D.
कर्पूरमञ्जरी में
Correct Answer:
Option C - ‘छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति’ यह सूक्ति मृच्छकटिकम् में लिखित है। मृच्छकटिकम् की रचना शूद्रक ने की थी। इसमें चारुदत्त (ब्राह्मण) एवं बसन्तसेना (वेश्या) की प्रणयकथा का वर्णन किया गया है।
C. ‘छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति’ यह सूक्ति मृच्छकटिकम् में लिखित है। मृच्छकटिकम् की रचना शूद्रक ने की थी। इसमें चारुदत्त (ब्राह्मण) एवं बसन्तसेना (वेश्या) की प्रणयकथा का वर्णन किया गया है।
Explanations:
‘छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति’ यह सूक्ति मृच्छकटिकम् में लिखित है। मृच्छकटिकम् की रचना शूद्रक ने की थी। इसमें चारुदत्त (ब्राह्मण) एवं बसन्तसेना (वेश्या) की प्रणयकथा का वर्णन किया गया है।
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