search
Q: The Articles 25 to 28 of the India Constitution talks about. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक _____ के विषय में बताया गया है।
  • A. Right to Freedom of Religion/धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
  • B. Right to Constitutional Remedies /संवैधानिक उपचारों का अधिकार
  • C. Cultural and Educational Rights/सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार
  • D. Right against Exploitation/शोषण के विरुद्ध अधिकार
Correct Answer: Option A - भारतीय संविधान के भाग-III में अनुच्छेद- 12 से 35 के अन्तर्गत मौलिक आधिकारों का वर्णन है। जिसके तहत अनुच्छेद-25 से 28 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया गया है। अनुच्छेद-25 में अंत: करण से किसी धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद -26 धर्म विषयक कार्यों को प्रबंधित करने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद-28 कुछ शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक आयोजन में भाग लेने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद-32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करता है; जिसका तात्पर्य व्यक्ति मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार रखता है।
A. भारतीय संविधान के भाग-III में अनुच्छेद- 12 से 35 के अन्तर्गत मौलिक आधिकारों का वर्णन है। जिसके तहत अनुच्छेद-25 से 28 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया गया है। अनुच्छेद-25 में अंत: करण से किसी धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद -26 धर्म विषयक कार्यों को प्रबंधित करने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद-28 कुछ शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक आयोजन में भाग लेने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद-32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करता है; जिसका तात्पर्य व्यक्ति मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार रखता है।

Explanations:

भारतीय संविधान के भाग-III में अनुच्छेद- 12 से 35 के अन्तर्गत मौलिक आधिकारों का वर्णन है। जिसके तहत अनुच्छेद-25 से 28 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया गया है। अनुच्छेद-25 में अंत: करण से किसी धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद -26 धर्म विषयक कार्यों को प्रबंधित करने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद-28 कुछ शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक आयोजन में भाग लेने की स्वतंत्रता। अनुच्छेद-32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करता है; जिसका तात्पर्य व्यक्ति मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार रखता है।