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Q: बेहोश मिले व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करेंगे?
  • A. तुरन्त डाक्टर के पास ले जाएँगे
  • B. देखेंगे कि साँस चल रही है या नहीं
  • C. मुँह पर पानी के छींटे देंगे
  • D. कपड़े ढीले करेंगे
Correct Answer: Option B - अनेक बार हम देखते हैं कि व्यक्ति चलते–2 या कार्यशाला में कार्य करते हुए किसी चीज से टकराने पर या बिजली के झटके से एकाएक लड़खड़ा कर गिर पड़ता है और गिरते ही बेहोश हो जाता है। सामान्यतया परिक्षण के समय यह देखा जाता है कि व्यक्ति की साँसे चल रही हैं कि नहीं दिल धड़क रहा है कि नहीं। यदि साँस नहीं चल रही तथा दिल–नहीं धड़क रहा है। उस स्थिति में तुरंत ही उसे प्राथमिक उपचार देना आवश्यक होता है। क्योंकि चिकित्सकों का कहना है कि व्यक्ति के दिल की धड़कन बन्द हो जाने पर उसको तीन मिनट अर्थात् 180 sec के भीतर साँस तथा दिल की धड़कन पुन: चालु न किया जाए तो उस व्यक्ति के मस्तिष्क को हानि पहुँचने की आंशका रहती है चाहे उसकी जान क्यों न बच जाए।
B. अनेक बार हम देखते हैं कि व्यक्ति चलते–2 या कार्यशाला में कार्य करते हुए किसी चीज से टकराने पर या बिजली के झटके से एकाएक लड़खड़ा कर गिर पड़ता है और गिरते ही बेहोश हो जाता है। सामान्यतया परिक्षण के समय यह देखा जाता है कि व्यक्ति की साँसे चल रही हैं कि नहीं दिल धड़क रहा है कि नहीं। यदि साँस नहीं चल रही तथा दिल–नहीं धड़क रहा है। उस स्थिति में तुरंत ही उसे प्राथमिक उपचार देना आवश्यक होता है। क्योंकि चिकित्सकों का कहना है कि व्यक्ति के दिल की धड़कन बन्द हो जाने पर उसको तीन मिनट अर्थात् 180 sec के भीतर साँस तथा दिल की धड़कन पुन: चालु न किया जाए तो उस व्यक्ति के मस्तिष्क को हानि पहुँचने की आंशका रहती है चाहे उसकी जान क्यों न बच जाए।

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अनेक बार हम देखते हैं कि व्यक्ति चलते–2 या कार्यशाला में कार्य करते हुए किसी चीज से टकराने पर या बिजली के झटके से एकाएक लड़खड़ा कर गिर पड़ता है और गिरते ही बेहोश हो जाता है। सामान्यतया परिक्षण के समय यह देखा जाता है कि व्यक्ति की साँसे चल रही हैं कि नहीं दिल धड़क रहा है कि नहीं। यदि साँस नहीं चल रही तथा दिल–नहीं धड़क रहा है। उस स्थिति में तुरंत ही उसे प्राथमिक उपचार देना आवश्यक होता है। क्योंकि चिकित्सकों का कहना है कि व्यक्ति के दिल की धड़कन बन्द हो जाने पर उसको तीन मिनट अर्थात् 180 sec के भीतर साँस तथा दिल की धड़कन पुन: चालु न किया जाए तो उस व्यक्ति के मस्तिष्क को हानि पहुँचने की आंशका रहती है चाहे उसकी जान क्यों न बच जाए।