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Q: ‘अवधि-शिला का उर पर, था गरु भार। तिल-तिल काट रही थी, दृग जल धार।।’ इस उद्धरण में प्रयुक्त छन्द है
  • A. ‘दोहा’
  • B. ‘सोरठा’
  • C. ‘बरवै’
  • D. ‘गीतिका’
Correct Answer: Option C - व्याख्या : उपर्युक्त उद्धरण में प्रयुक्त ‘बरवै’ छन्द है। बरवै अर्द्धसममात्रिक छन्द है। इस छन्द के विषम चरणों (पहला और तीसरा) में 12-12 और समचरणों (दूसरे और चौथे) में 7-7 मात्राएँ होती है। सम चरणों के अन्त में जगण या तगण आने से इस छन्द में मिठास बढ़ती है। यति प्रत्येक चरण के अन्त में होती है।
C. व्याख्या : उपर्युक्त उद्धरण में प्रयुक्त ‘बरवै’ छन्द है। बरवै अर्द्धसममात्रिक छन्द है। इस छन्द के विषम चरणों (पहला और तीसरा) में 12-12 और समचरणों (दूसरे और चौथे) में 7-7 मात्राएँ होती है। सम चरणों के अन्त में जगण या तगण आने से इस छन्द में मिठास बढ़ती है। यति प्रत्येक चरण के अन्त में होती है।

Explanations:

व्याख्या : उपर्युक्त उद्धरण में प्रयुक्त ‘बरवै’ छन्द है। बरवै अर्द्धसममात्रिक छन्द है। इस छन्द के विषम चरणों (पहला और तीसरा) में 12-12 और समचरणों (दूसरे और चौथे) में 7-7 मात्राएँ होती है। सम चरणों के अन्त में जगण या तगण आने से इस छन्द में मिठास बढ़ती है। यति प्रत्येक चरण के अन्त में होती है।