Correct Answer:
Option C - व्याख्या : उपर्युक्त उद्धरण में प्रयुक्त ‘बरवै’ छन्द है। बरवै अर्द्धसममात्रिक छन्द है। इस छन्द के विषम चरणों (पहला और तीसरा) में 12-12 और समचरणों (दूसरे और चौथे) में 7-7 मात्राएँ होती है। सम चरणों के अन्त में जगण या तगण आने से इस छन्द में मिठास बढ़ती है। यति प्रत्येक चरण के अन्त में होती है।
C. व्याख्या : उपर्युक्त उद्धरण में प्रयुक्त ‘बरवै’ छन्द है। बरवै अर्द्धसममात्रिक छन्द है। इस छन्द के विषम चरणों (पहला और तीसरा) में 12-12 और समचरणों (दूसरे और चौथे) में 7-7 मात्राएँ होती है। सम चरणों के अन्त में जगण या तगण आने से इस छन्द में मिठास बढ़ती है। यति प्रत्येक चरण के अन्त में होती है।