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Q: निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
  • A. कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली पर 1206-1210 तक शासन किया
  • B. दिल्ली सुल्तानों के समय अरबी प्रशासनिक कामकाज की भाषा थी।
  • C. दिल्ली पहले तोमर राजपूतों के अधीन एक राज्य की राजधानी बनी।
  • D. दिल्ली में ढाले गए सिक्कों को ‘देहलीवाल’ कहा जाता था।
Correct Answer: Option B - दिल्ली नगर की स्थापना 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजपूत शासक अनंगपाल द्वितीय (अनंग पाल तोमर) द्वारा की गयी और बाद में पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली पर शासन किया। 1192 ई. में ‘तराइन की दूसरी लड़ाई’ में मुहम्मद गौरी से पृथ्वीराज चौहान के पराजित हो जाने पर दिल्ली मुस्लिम शासको के नियंत्रण में आ गयी और आगामी 600 वर्षो तक उनके अधीन रही। कुतुबुद्दीन ऐबक 1206-1210 ई. तक दिल्ली पर शासन किया। दिल्ली के सुल्तानों के शासनकाल में प्रशासनिक कामकाज की भाषा ‘फारसी’ थी तथा यहा ढाले गये सिक्कों को ‘देहलीवाल’ कहा जाता था।
B. दिल्ली नगर की स्थापना 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजपूत शासक अनंगपाल द्वितीय (अनंग पाल तोमर) द्वारा की गयी और बाद में पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली पर शासन किया। 1192 ई. में ‘तराइन की दूसरी लड़ाई’ में मुहम्मद गौरी से पृथ्वीराज चौहान के पराजित हो जाने पर दिल्ली मुस्लिम शासको के नियंत्रण में आ गयी और आगामी 600 वर्षो तक उनके अधीन रही। कुतुबुद्दीन ऐबक 1206-1210 ई. तक दिल्ली पर शासन किया। दिल्ली के सुल्तानों के शासनकाल में प्रशासनिक कामकाज की भाषा ‘फारसी’ थी तथा यहा ढाले गये सिक्कों को ‘देहलीवाल’ कहा जाता था।

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दिल्ली नगर की स्थापना 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजपूत शासक अनंगपाल द्वितीय (अनंग पाल तोमर) द्वारा की गयी और बाद में पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली पर शासन किया। 1192 ई. में ‘तराइन की दूसरी लड़ाई’ में मुहम्मद गौरी से पृथ्वीराज चौहान के पराजित हो जाने पर दिल्ली मुस्लिम शासको के नियंत्रण में आ गयी और आगामी 600 वर्षो तक उनके अधीन रही। कुतुबुद्दीन ऐबक 1206-1210 ई. तक दिल्ली पर शासन किया। दिल्ली के सुल्तानों के शासनकाल में प्रशासनिक कामकाज की भाषा ‘फारसी’ थी तथा यहा ढाले गये सिक्कों को ‘देहलीवाल’ कहा जाता था।