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Q: अष्टाध्यायी का दूसरा नाम है–
  • A. वाक्यशासन
  • B. शब्दानुशासन
  • C. अर्थानुशासन
  • D. अनुशासन
Correct Answer: Option B - संस्कृत व्याकरण में अष्टाध्यायी का एक प्रमुख स्थान है। यह संस्कृत व्याकरण की प्रथम पुस्तक है जिसकी रचना मर्हिष पाणिनी ने की है। यह आठ अध्यायों में विभाजित है जिसके आधार पर इसका नाम अष्टाध्यायी पड़ा। इसका दूसरा नाम शब्दानुशासन भी है। अष्टाध्यायी में कात्यायन ने वार्तिक लिखे हैं, जो वार्तिक नियमों का तथा वृत्तियों का निर्वचन भी करते हैं। इसीलिए इन्हें ‘वार्तिककार’ कहते हैं। अष्टाध्यायी में लगभग 4,000 (चार हजार) सूत्र हैं।
B. संस्कृत व्याकरण में अष्टाध्यायी का एक प्रमुख स्थान है। यह संस्कृत व्याकरण की प्रथम पुस्तक है जिसकी रचना मर्हिष पाणिनी ने की है। यह आठ अध्यायों में विभाजित है जिसके आधार पर इसका नाम अष्टाध्यायी पड़ा। इसका दूसरा नाम शब्दानुशासन भी है। अष्टाध्यायी में कात्यायन ने वार्तिक लिखे हैं, जो वार्तिक नियमों का तथा वृत्तियों का निर्वचन भी करते हैं। इसीलिए इन्हें ‘वार्तिककार’ कहते हैं। अष्टाध्यायी में लगभग 4,000 (चार हजार) सूत्र हैं।

Explanations:

संस्कृत व्याकरण में अष्टाध्यायी का एक प्रमुख स्थान है। यह संस्कृत व्याकरण की प्रथम पुस्तक है जिसकी रचना मर्हिष पाणिनी ने की है। यह आठ अध्यायों में विभाजित है जिसके आधार पर इसका नाम अष्टाध्यायी पड़ा। इसका दूसरा नाम शब्दानुशासन भी है। अष्टाध्यायी में कात्यायन ने वार्तिक लिखे हैं, जो वार्तिक नियमों का तथा वृत्तियों का निर्वचन भी करते हैं। इसीलिए इन्हें ‘वार्तिककार’ कहते हैं। अष्टाध्यायी में लगभग 4,000 (चार हजार) सूत्र हैं।