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Q: ‘‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’’ - पद्यांशोऽयं कस्मिन ग्रन्थे उल्लिखितोऽस्ति?
  • A. अभिज्ञानशाकुन्तले
  • B. वेणीसंहारे
  • C. मृच्छकटिके
  • D. उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
  • E. उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति
Correct Answer: Option A - ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ पद्यांशोऽयं अभिज्ञान शाकुन्तले उल्लिखितोऽस्ति। ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ यह पद्यांश अभिज्ञानशाकुन्तलम् में प्राप्त होता है। यह सूक्ति अभिज्ञान के चतुर्थ अंक में पायी जाती है वेणीसंहार भट्ट नारायण की रचना है यह 6 अंकों में निबद्ध है। ‘मृच्छकटिकम्’ 10 अंकों में निरूपित प्रकरण ग्रन्थ है जिसके रचयिता महाकवि शूद्रक हैं।
A. ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ पद्यांशोऽयं अभिज्ञान शाकुन्तले उल्लिखितोऽस्ति। ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ यह पद्यांश अभिज्ञानशाकुन्तलम् में प्राप्त होता है। यह सूक्ति अभिज्ञान के चतुर्थ अंक में पायी जाती है वेणीसंहार भट्ट नारायण की रचना है यह 6 अंकों में निबद्ध है। ‘मृच्छकटिकम्’ 10 अंकों में निरूपित प्रकरण ग्रन्थ है जिसके रचयिता महाकवि शूद्रक हैं।

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‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ पद्यांशोऽयं अभिज्ञान शाकुन्तले उल्लिखितोऽस्ति। ‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’ यह पद्यांश अभिज्ञानशाकुन्तलम् में प्राप्त होता है। यह सूक्ति अभिज्ञान के चतुर्थ अंक में पायी जाती है वेणीसंहार भट्ट नारायण की रचना है यह 6 अंकों में निबद्ध है। ‘मृच्छकटिकम्’ 10 अंकों में निरूपित प्रकरण ग्रन्थ है जिसके रचयिता महाकवि शूद्रक हैं।