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Q: बंगाल शैली के एक चित्रकार जो सच्चे वैष्णव जन की भांति अपने चित्रों में राधा-कृष्ण का ही चित्रांकन करते रहे, वे हैं─
  • A. नंदलाल बोस
  • B. डी. पी. रायचौधरी
  • C. यामिनी रॉय
  • D. क्षितीन्द्रनाथ मजुमदार
Correct Answer: Option D - क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कला के शिक्षक पद पर 22 वर्षों तक रहे। इन्होंने वैष्णव धर्म से सम्बन्धित चित्रों का निर्माण किया इनके प्रमुख चित्र में चैतन्य का गृह त्याग, चैतन्य की चटशाला, गुरु के द्वार पर, पालित मृग आदि। क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार ने `गीत-गोविन्द' नामक एक चित्र शृंखला का निर्माण किया था जिसमें उन्होंने श्रीकृष्ण एवं राधा का चित्रांकन अधिक किया है।
D. क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कला के शिक्षक पद पर 22 वर्षों तक रहे। इन्होंने वैष्णव धर्म से सम्बन्धित चित्रों का निर्माण किया इनके प्रमुख चित्र में चैतन्य का गृह त्याग, चैतन्य की चटशाला, गुरु के द्वार पर, पालित मृग आदि। क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार ने `गीत-गोविन्द' नामक एक चित्र शृंखला का निर्माण किया था जिसमें उन्होंने श्रीकृष्ण एवं राधा का चित्रांकन अधिक किया है।

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क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कला के शिक्षक पद पर 22 वर्षों तक रहे। इन्होंने वैष्णव धर्म से सम्बन्धित चित्रों का निर्माण किया इनके प्रमुख चित्र में चैतन्य का गृह त्याग, चैतन्य की चटशाला, गुरु के द्वार पर, पालित मृग आदि। क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार ने `गीत-गोविन्द' नामक एक चित्र शृंखला का निर्माण किया था जिसमें उन्होंने श्रीकृष्ण एवं राधा का चित्रांकन अधिक किया है।