Correct Answer:
Option C - मोहन राकेश कृत ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में निम्नलिखित कथन मल्लिका द्वारा नहीं कहा गया है-
• इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय है। - प्रियंगु मंजरी
• मैंने सुना है। विश्वास नहीं होता, परन्तु होता भी है। - मातुल
• थक गया था। अब भी थका हूँ परन्तु वर्षा ने थकान कम कर दी है। - कालिदास
मल्लिका के कथन-
1. हमारा सौभाग्य होगा कि आप कुछ दिन इस प्रदेश में रह जाएँ।
2. नहीं; यह सत्य नहीं हो सकता। मेरा हृदय इसे स्वीकार नहीं करता।
3. थके हो, बैठ जाओ। आँखों से लगता है, तुम अब भी स्वस्थ नहीं हो।
4. उज्जयिनी के व्यवसायी कभी-कभी इस मार्ग से होकर भी जाते हैं।
• मोहन राकेश द्वारा रचित ‘आषाढ़ का एक दिन’ (1958ई.) महाकवि कालिदास के निजी जीवन पर केन्द्रित है, जो 100ई. पू. से 500ई. के अनुमानित काल में व्यतीत हुआ।
• इस नाटक का शीर्षक कालिदास की कृति मेघदूतम् की शुरुआती पंक्तियों से लिया गया है।
• मोहन राकेश की प्रमुख कृतियाँ-आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे, पैर तले की जमीन (अधूरा) सिपाही की माँ, प्यालियाँ टूटती हैं। रात बीतने तक, छतरियाँ, शायद आदि।
C. मोहन राकेश कृत ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में निम्नलिखित कथन मल्लिका द्वारा नहीं कहा गया है-
• इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय है। - प्रियंगु मंजरी
• मैंने सुना है। विश्वास नहीं होता, परन्तु होता भी है। - मातुल
• थक गया था। अब भी थका हूँ परन्तु वर्षा ने थकान कम कर दी है। - कालिदास
मल्लिका के कथन-
1. हमारा सौभाग्य होगा कि आप कुछ दिन इस प्रदेश में रह जाएँ।
2. नहीं; यह सत्य नहीं हो सकता। मेरा हृदय इसे स्वीकार नहीं करता।
3. थके हो, बैठ जाओ। आँखों से लगता है, तुम अब भी स्वस्थ नहीं हो।
4. उज्जयिनी के व्यवसायी कभी-कभी इस मार्ग से होकर भी जाते हैं।
• मोहन राकेश द्वारा रचित ‘आषाढ़ का एक दिन’ (1958ई.) महाकवि कालिदास के निजी जीवन पर केन्द्रित है, जो 100ई. पू. से 500ई. के अनुमानित काल में व्यतीत हुआ।
• इस नाटक का शीर्षक कालिदास की कृति मेघदूतम् की शुरुआती पंक्तियों से लिया गया है।
• मोहन राकेश की प्रमुख कृतियाँ-आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे, पैर तले की जमीन (अधूरा) सिपाही की माँ, प्यालियाँ टूटती हैं। रात बीतने तक, छतरियाँ, शायद आदि।