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Q: ‘अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमद:’ इतीयं सूक्तिर्विद्यते
  • A. अभिज्ञानशाकुन्तले
  • B. उत्तररामचरिते
  • C. कादम्बर्यां शुकनासोपदेशे
  • D. नलचम्पूकाव्ये
Correct Answer: Option C - ‘अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमद: ‘इतीयं सूक्ति कादम्बर्यां शुकनासोपदेशे विद्यते। मंत्री शुकनास चन्द्रापीड के राज्याभिषेक के समय उपदेश देते हुए कहते हैं कि- धन से उत्पन्न नशा ऐसा तीक्ष्ण होता है जो अन्तिम (वृद्धा) अवस्था में भी शान्त नहीं होता अर्थात् मरते दम तक भी नहीं उतरता। अपरिणामोपशम:- प्रत्येक नशे का कुछ निश्चित समय होता है और अन्तिम समय तक वह उतर जाता है, किन्तु लक्ष्मी का नशा मरते समय तक भी नहीं उतरता लक्ष्मीमद:-लक्ष्म्या: मद:-(षष्ठी तत्पुरुष समास)।
C. ‘अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमद: ‘इतीयं सूक्ति कादम्बर्यां शुकनासोपदेशे विद्यते। मंत्री शुकनास चन्द्रापीड के राज्याभिषेक के समय उपदेश देते हुए कहते हैं कि- धन से उत्पन्न नशा ऐसा तीक्ष्ण होता है जो अन्तिम (वृद्धा) अवस्था में भी शान्त नहीं होता अर्थात् मरते दम तक भी नहीं उतरता। अपरिणामोपशम:- प्रत्येक नशे का कुछ निश्चित समय होता है और अन्तिम समय तक वह उतर जाता है, किन्तु लक्ष्मी का नशा मरते समय तक भी नहीं उतरता लक्ष्मीमद:-लक्ष्म्या: मद:-(षष्ठी तत्पुरुष समास)।

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‘अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमद: ‘इतीयं सूक्ति कादम्बर्यां शुकनासोपदेशे विद्यते। मंत्री शुकनास चन्द्रापीड के राज्याभिषेक के समय उपदेश देते हुए कहते हैं कि- धन से उत्पन्न नशा ऐसा तीक्ष्ण होता है जो अन्तिम (वृद्धा) अवस्था में भी शान्त नहीं होता अर्थात् मरते दम तक भी नहीं उतरता। अपरिणामोपशम:- प्रत्येक नशे का कुछ निश्चित समय होता है और अन्तिम समय तक वह उतर जाता है, किन्तु लक्ष्मी का नशा मरते समय तक भी नहीं उतरता लक्ष्मीमद:-लक्ष्म्या: मद:-(षष्ठी तत्पुरुष समास)।