Correct Answer:
Option D - हीमोथोरेक्स वह स्थिति है, जब रक्त वक्ष (Chest) एवं फेफड़ों में इकट्ठा होने लगता है। वक्ष एवं फेफड़ों के बीच खाली जगह को प्ल्युरल स्पेस कहा जाता है। सीने में दर्द, भारीपन महसूस होना, घबराहट, सांस लेने में तकलीफ (डिस्पेनिया), सांस का जल्दी-जल्दी आना, हृदय की धड़कन बढ़ जाना, तेज बुखार आदि इसके लक्षण हैं।
∎ न्यूमोथोरेक्स वह स्थिति है जब वक्ष एवं फेफड़ों के मध्य अधिक हवा भर जाती है इससे फेफड़ों की दीवार पर अधिक दाब बढ़ने से फेफड़ों के खराब (Collapse) होने का खतरा बढ़ जाता है।
∎ प्ल्यूरल गुहा (Pleural space or cavity) में लिम्फैटिक द्रव के भर जाने की स्थिति चाइलोथोरेक्स (Chylothrax) कहलाती है।
D. हीमोथोरेक्स वह स्थिति है, जब रक्त वक्ष (Chest) एवं फेफड़ों में इकट्ठा होने लगता है। वक्ष एवं फेफड़ों के बीच खाली जगह को प्ल्युरल स्पेस कहा जाता है। सीने में दर्द, भारीपन महसूस होना, घबराहट, सांस लेने में तकलीफ (डिस्पेनिया), सांस का जल्दी-जल्दी आना, हृदय की धड़कन बढ़ जाना, तेज बुखार आदि इसके लक्षण हैं।
∎ न्यूमोथोरेक्स वह स्थिति है जब वक्ष एवं फेफड़ों के मध्य अधिक हवा भर जाती है इससे फेफड़ों की दीवार पर अधिक दाब बढ़ने से फेफड़ों के खराब (Collapse) होने का खतरा बढ़ जाता है।
∎ प्ल्यूरल गुहा (Pleural space or cavity) में लिम्फैटिक द्रव के भर जाने की स्थिति चाइलोथोरेक्स (Chylothrax) कहलाती है।