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Q: ऐतिहासिक ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण कई शासकों द्वारा कराया गया था। मौर्य वंश के शासन काल के दौरान इसे क्या कहा जाता था?
  • A. उत्तरापथ
  • B. पूर्वी पथ
  • C. बादशाही सड़क
  • D. राजपथ
Correct Answer: Option A - मौर्य काल में:– इस सड़क को उत्तरापथ के नाम से जाना जाता था। यह मार्ग गंगा नदी के किनारे से होते हुए, गंगा के मैदान के पार, पंजाब के रास्ते तक्षशिला को जाता था। आठ चरणों में निर्मित यह राजमार्ग पेशावर, तक्षशिला, हस्तिनापुर, कन्नौज, प्रयाग, पाटलिपुत्र और ताम्रलिप्ति के शहरों को जोड़ता था। मुगल काल में:– मौर्य काल के बाद इस मार्ग में तब बड़ा बदलाव हुआ जब इस मार्ग का ज्यादातर भाग शेरशाह सूरी द्वारा नए सिरे से पुनर्निर्मित कराया गया। सासाराम, अपने गृहनगर के साथ, आगरा तथा अपनी राजधानी को जोड़ना। शेरशाह के देहांत के बाद इस सड़क का नाम ‘सड़क-ए-आजम’ उनके नाम पर समर्पित कर दिया गया। इसके बाद मुगल शासकों ने इसे पश्चिम में खैबर दर्रे को पार कर काबुल तक और पूर्व में बंगाल के चटगांव बंदरगाह तक बढ़ाया। अंग्रेजों के काल में:–17वीें सदी में इस मार्ग का ब्रिटिश शासकों ने पुनर्निर्माण किया और इसका नाम बदलकर ग्रैंड ट्रंक रोड कर दिया
A. मौर्य काल में:– इस सड़क को उत्तरापथ के नाम से जाना जाता था। यह मार्ग गंगा नदी के किनारे से होते हुए, गंगा के मैदान के पार, पंजाब के रास्ते तक्षशिला को जाता था। आठ चरणों में निर्मित यह राजमार्ग पेशावर, तक्षशिला, हस्तिनापुर, कन्नौज, प्रयाग, पाटलिपुत्र और ताम्रलिप्ति के शहरों को जोड़ता था। मुगल काल में:– मौर्य काल के बाद इस मार्ग में तब बड़ा बदलाव हुआ जब इस मार्ग का ज्यादातर भाग शेरशाह सूरी द्वारा नए सिरे से पुनर्निर्मित कराया गया। सासाराम, अपने गृहनगर के साथ, आगरा तथा अपनी राजधानी को जोड़ना। शेरशाह के देहांत के बाद इस सड़क का नाम ‘सड़क-ए-आजम’ उनके नाम पर समर्पित कर दिया गया। इसके बाद मुगल शासकों ने इसे पश्चिम में खैबर दर्रे को पार कर काबुल तक और पूर्व में बंगाल के चटगांव बंदरगाह तक बढ़ाया। अंग्रेजों के काल में:–17वीें सदी में इस मार्ग का ब्रिटिश शासकों ने पुनर्निर्माण किया और इसका नाम बदलकर ग्रैंड ट्रंक रोड कर दिया

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मौर्य काल में:– इस सड़क को उत्तरापथ के नाम से जाना जाता था। यह मार्ग गंगा नदी के किनारे से होते हुए, गंगा के मैदान के पार, पंजाब के रास्ते तक्षशिला को जाता था। आठ चरणों में निर्मित यह राजमार्ग पेशावर, तक्षशिला, हस्तिनापुर, कन्नौज, प्रयाग, पाटलिपुत्र और ताम्रलिप्ति के शहरों को जोड़ता था। मुगल काल में:– मौर्य काल के बाद इस मार्ग में तब बड़ा बदलाव हुआ जब इस मार्ग का ज्यादातर भाग शेरशाह सूरी द्वारा नए सिरे से पुनर्निर्मित कराया गया। सासाराम, अपने गृहनगर के साथ, आगरा तथा अपनी राजधानी को जोड़ना। शेरशाह के देहांत के बाद इस सड़क का नाम ‘सड़क-ए-आजम’ उनके नाम पर समर्पित कर दिया गया। इसके बाद मुगल शासकों ने इसे पश्चिम में खैबर दर्रे को पार कर काबुल तक और पूर्व में बंगाल के चटगांव बंदरगाह तक बढ़ाया। अंग्रेजों के काल में:–17वीें सदी में इस मार्ग का ब्रिटिश शासकों ने पुनर्निर्माण किया और इसका नाम बदलकर ग्रैंड ट्रंक रोड कर दिया