Correct Answer:
Option A - IS 712–1984, क्लाज संख्या 3.1, के अनुसार, चूने को 6 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
श्रेणी A– संरचनात्मक उददेश्यों के लिए श्रेष्ठ जलीय चूने का प्रयोग किया जाता है।
श्रेणी B– अर्ध-जलीय चूना चिनाई मसाला, चूना कंक्रीट और कोट के नीचे प्लास्टर करने के लिए उपयोग किया जाता है।
श्रेणी C– फैट चूने का उपयोग प्लास्टर, सफेदी, मिश्रित मसाला इत्यादि में फिनिशिंग कोट के लिए और चिनाई मसाला के लिए पोजोलैनिक सामग्री के साथ किया जाता है।
श्रेणी D– मैग्निशियम/डोलोमिटिक चूने का उपयोग प्लास्टर, सफेदी आदि में फिनिशिंग कोट के लिए किया जाता है।
श्रेणी E – कंकर चूने का उपयोग चिनाई मसाले के लिए किया जाता है।
श्रेणी F– सिलिसियस डोलोमिटिक चूने का उपयोग प्लास्टर के फिनिशिंग कोट और अण्डर कोट के लिए किया जाता है।
A. IS 712–1984, क्लाज संख्या 3.1, के अनुसार, चूने को 6 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
श्रेणी A– संरचनात्मक उददेश्यों के लिए श्रेष्ठ जलीय चूने का प्रयोग किया जाता है।
श्रेणी B– अर्ध-जलीय चूना चिनाई मसाला, चूना कंक्रीट और कोट के नीचे प्लास्टर करने के लिए उपयोग किया जाता है।
श्रेणी C– फैट चूने का उपयोग प्लास्टर, सफेदी, मिश्रित मसाला इत्यादि में फिनिशिंग कोट के लिए और चिनाई मसाला के लिए पोजोलैनिक सामग्री के साथ किया जाता है।
श्रेणी D– मैग्निशियम/डोलोमिटिक चूने का उपयोग प्लास्टर, सफेदी आदि में फिनिशिंग कोट के लिए किया जाता है।
श्रेणी E – कंकर चूने का उपयोग चिनाई मसाले के लिए किया जाता है।
श्रेणी F– सिलिसियस डोलोमिटिक चूने का उपयोग प्लास्टर के फिनिशिंग कोट और अण्डर कोट के लिए किया जाता है।