Correct Answer:
Option C - एरिक्सन ने अपने अध्ययन में पाया कि बच्चों के मानसिक विकास के साथ-साथ उनका सामाजिक विकास भी होता है। इसीलिए उन्होंने दोनों को एकसाथ मनोसामाजिक विकास के रूप में लिया। एरिक्सन के सिद्धान्त के अनुसार पूरा जीवन विकास के आठ चरणों से होकर जाता है। प्रत्येक चरण में एक विशिष्ट विकासात्मक मानक होता है, जिसे पूरा करने में आने वाली समस्याओं को समाधान करना आवश्यक होता है। उपर्युक्त प्रश्न में इनके 8 चरणों में से 5वाँ चरण अर्थात् पहचान बनाम पहचान भ्रान्ति की व्याख्या की गई हैं इसका अनुभव किशोरावस्था (13-21 वर्ष) में होता है। इस समय व्यक्ति को इन प्रश्नों का सामना करना पड़ता है कि वे कौन है? किससे संबंधित है? और उनका जीवन कहाँ जा रहा है? इसमें एक सुसंगत अवधारणा होती है जो लक्ष्यों, मूल्यों और विश्वासों से बनी होती है, जिसके लिए व्यक्ति को ठोस रूप से प्रतिबद्ध होना पड़ता है। इसमें इनकी कई सारी भूमिकाएँ होती है और उन्हें कई स्थितियों का सामना करना पड़ता हैं। यदि वह ऐसी स्थिति का सामना करने में अक्षम होता है तब उनमें पहचान भ्रान्ति की स्थिति आ जाती है।
C. एरिक्सन ने अपने अध्ययन में पाया कि बच्चों के मानसिक विकास के साथ-साथ उनका सामाजिक विकास भी होता है। इसीलिए उन्होंने दोनों को एकसाथ मनोसामाजिक विकास के रूप में लिया। एरिक्सन के सिद्धान्त के अनुसार पूरा जीवन विकास के आठ चरणों से होकर जाता है। प्रत्येक चरण में एक विशिष्ट विकासात्मक मानक होता है, जिसे पूरा करने में आने वाली समस्याओं को समाधान करना आवश्यक होता है। उपर्युक्त प्रश्न में इनके 8 चरणों में से 5वाँ चरण अर्थात् पहचान बनाम पहचान भ्रान्ति की व्याख्या की गई हैं इसका अनुभव किशोरावस्था (13-21 वर्ष) में होता है। इस समय व्यक्ति को इन प्रश्नों का सामना करना पड़ता है कि वे कौन है? किससे संबंधित है? और उनका जीवन कहाँ जा रहा है? इसमें एक सुसंगत अवधारणा होती है जो लक्ष्यों, मूल्यों और विश्वासों से बनी होती है, जिसके लिए व्यक्ति को ठोस रूप से प्रतिबद्ध होना पड़ता है। इसमें इनकी कई सारी भूमिकाएँ होती है और उन्हें कई स्थितियों का सामना करना पड़ता हैं। यदि वह ऐसी स्थिति का सामना करने में अक्षम होता है तब उनमें पहचान भ्रान्ति की स्थिति आ जाती है।