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Q: अभिधामूला-व्यञ्जनाया: लक्षणमस्ति –
  • A. अनेकार्थस्य शब्दस्य संयोगाद्यैर्नियन्त्रिते
  • B. लक्षणोपास्यते यस्त कृते तत्तु प्रयोजनम्
  • C. विभावेनानुभावेन व्यक्त: संचारिणा तथा
  • D. तात्पर्याख्यां वृत्तिमाहु: पदार्थान्वयबोधने
Correct Answer: Option A - अभिधामूला-व्यञ्जनाया: लक्षणम् ‘अनेकार्थस्य शब्दस्य संयोगाद्यैर्नियन्त्रिते’ अस्ति। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार शाब्दी व्यञ्जना के दो भेद हैं–अभिधामूला व्यञ्जना और लक्षणामूला व्यञ्जना। अभिधामूला व्यञ्जना का लक्षण इस प्रकार है– अनेकार्थस्य शब्दस्य संयोगाद्यैर्नियन्त्रिते। एकत्रार्थेऽन्यधी हेतुर्व्यांञ्जना साऽभिधाश्रया।। (2/14) अनेकार्थक शब्दों का संयोगादि से एक अर्थ में नियंत्रित होने पर, एकार्थ बोध कराने वाली व्यञ्जना अभिधा आश्रयी होती है अर्थात् अभिधामूला व्यञ्जना होती है।
A. अभिधामूला-व्यञ्जनाया: लक्षणम् ‘अनेकार्थस्य शब्दस्य संयोगाद्यैर्नियन्त्रिते’ अस्ति। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार शाब्दी व्यञ्जना के दो भेद हैं–अभिधामूला व्यञ्जना और लक्षणामूला व्यञ्जना। अभिधामूला व्यञ्जना का लक्षण इस प्रकार है– अनेकार्थस्य शब्दस्य संयोगाद्यैर्नियन्त्रिते। एकत्रार्थेऽन्यधी हेतुर्व्यांञ्जना साऽभिधाश्रया।। (2/14) अनेकार्थक शब्दों का संयोगादि से एक अर्थ में नियंत्रित होने पर, एकार्थ बोध कराने वाली व्यञ्जना अभिधा आश्रयी होती है अर्थात् अभिधामूला व्यञ्जना होती है।

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अभिधामूला-व्यञ्जनाया: लक्षणम् ‘अनेकार्थस्य शब्दस्य संयोगाद्यैर्नियन्त्रिते’ अस्ति। आचार्य विश्वनाथ के अनुसार शाब्दी व्यञ्जना के दो भेद हैं–अभिधामूला व्यञ्जना और लक्षणामूला व्यञ्जना। अभिधामूला व्यञ्जना का लक्षण इस प्रकार है– अनेकार्थस्य शब्दस्य संयोगाद्यैर्नियन्त्रिते। एकत्रार्थेऽन्यधी हेतुर्व्यांञ्जना साऽभिधाश्रया।। (2/14) अनेकार्थक शब्दों का संयोगादि से एक अर्थ में नियंत्रित होने पर, एकार्थ बोध कराने वाली व्यञ्जना अभिधा आश्रयी होती है अर्थात् अभिधामूला व्यञ्जना होती है।