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Q: ‘आहारप्रदानेन’ इत्यत्र क: समास:?
  • A. तत्पुरुष:
  • B. बहुव्रीहि:
  • C. द्वन्द्व:
  • D. कर्मधारय:
Correct Answer: Option A - ‘आहारप्रदानेन’ इत्यत्र तत्पुरुष समास: अस्ति। अर्थात् ‘अहार प्रदानेन’ यहाँ पर तत्पूरुष समास है। विग्रह – आहारं प्रदानेन = आहारप्रदानेन (द्वितीया तत्पुरुष) प्रयेण उत्तरपदार्थ प्रधान: तत्पुरुष: – अर्थात् जिस समास में प्राय: उत्तर पद प्रधान होता है। वह तत्पुरुष समास है। तत्पुरुष समास के दो अर्थ हो सकते हैं (1) तस्य पुरुष: · तत्पुरुष: (2) स: पुरुष: तत्पुरुष:। इनके अनुसार तत्पुरुष समास के दो मुख्य भेद होते हैं। (1) व्यधिकरण (2) समानाधिकरण समानाधिकरण को कर्मधारय कहते है तथा व्यधिकरण तत्पुरुष के छ: भेद होते है।
A. ‘आहारप्रदानेन’ इत्यत्र तत्पुरुष समास: अस्ति। अर्थात् ‘अहार प्रदानेन’ यहाँ पर तत्पूरुष समास है। विग्रह – आहारं प्रदानेन = आहारप्रदानेन (द्वितीया तत्पुरुष) प्रयेण उत्तरपदार्थ प्रधान: तत्पुरुष: – अर्थात् जिस समास में प्राय: उत्तर पद प्रधान होता है। वह तत्पुरुष समास है। तत्पुरुष समास के दो अर्थ हो सकते हैं (1) तस्य पुरुष: · तत्पुरुष: (2) स: पुरुष: तत्पुरुष:। इनके अनुसार तत्पुरुष समास के दो मुख्य भेद होते हैं। (1) व्यधिकरण (2) समानाधिकरण समानाधिकरण को कर्मधारय कहते है तथा व्यधिकरण तत्पुरुष के छ: भेद होते है।

Explanations:

‘आहारप्रदानेन’ इत्यत्र तत्पुरुष समास: अस्ति। अर्थात् ‘अहार प्रदानेन’ यहाँ पर तत्पूरुष समास है। विग्रह – आहारं प्रदानेन = आहारप्रदानेन (द्वितीया तत्पुरुष) प्रयेण उत्तरपदार्थ प्रधान: तत्पुरुष: – अर्थात् जिस समास में प्राय: उत्तर पद प्रधान होता है। वह तत्पुरुष समास है। तत्पुरुष समास के दो अर्थ हो सकते हैं (1) तस्य पुरुष: · तत्पुरुष: (2) स: पुरुष: तत्पुरुष:। इनके अनुसार तत्पुरुष समास के दो मुख्य भेद होते हैं। (1) व्यधिकरण (2) समानाधिकरण समानाधिकरण को कर्मधारय कहते है तथा व्यधिकरण तत्पुरुष के छ: भेद होते है।