Correct Answer:
Option D - पाश्चात्य साहित्य में कल्पना को बहुत महत्व दिया गया है। यूनानी दर्शन से लेकर आधुनिक काल तक कल्पना को रचनात्मकता, सृजनशीलता और ज्ञान के स्रोत के रूप में देखा जाता रहा है। यूनानी दार्शनिक प्लेटो ने कल्पना को ‘‘आत्मा का दिव्य भाग’’ माना। रोमन दार्शनिक सिसरो ने कहा कि, ‘‘कल्पना सभी कलाओं का जनक हैं।
पाश्चात्य साहित्य कल्पना प्रसूत है। इसमें कई कल्पित कहानियाँ, किंददंतियाँ और मिथक शामिल हैं। जैसे- होमर के महाकाव्य ‘इलियड’ और ‘ओडिसी’ शेक्सपियर के नाटक जॉन टॉल्किन की द लॉर्ड ऑफ रिंग्स त्रयी।
D. पाश्चात्य साहित्य में कल्पना को बहुत महत्व दिया गया है। यूनानी दर्शन से लेकर आधुनिक काल तक कल्पना को रचनात्मकता, सृजनशीलता और ज्ञान के स्रोत के रूप में देखा जाता रहा है। यूनानी दार्शनिक प्लेटो ने कल्पना को ‘‘आत्मा का दिव्य भाग’’ माना। रोमन दार्शनिक सिसरो ने कहा कि, ‘‘कल्पना सभी कलाओं का जनक हैं।
पाश्चात्य साहित्य कल्पना प्रसूत है। इसमें कई कल्पित कहानियाँ, किंददंतियाँ और मिथक शामिल हैं। जैसे- होमर के महाकाव्य ‘इलियड’ और ‘ओडिसी’ शेक्सपियर के नाटक जॉन टॉल्किन की द लॉर्ड ऑफ रिंग्स त्रयी।