Correct Answer:
Option B - द्वि-शाखी सोपान- यह सोपान आरम्भ में एकल पंक्ति का होता है, परन्तु कुछ ऊँचाई पर जाकर एक साँझी चौकी से दो विपरीत दिशाओं की पंक्तियों में विभाजित हो जाता है, या कह सकते है सांझी चौकी पर तीन उड़ाने विपरीत दिशाओं से आकर मिलती है।
∎ सार्वजनिक भवनों में इस प्रकार की जीना, भव्यता की दृष्टि से भी लगाया जाता है।
B. द्वि-शाखी सोपान- यह सोपान आरम्भ में एकल पंक्ति का होता है, परन्तु कुछ ऊँचाई पर जाकर एक साँझी चौकी से दो विपरीत दिशाओं की पंक्तियों में विभाजित हो जाता है, या कह सकते है सांझी चौकी पर तीन उड़ाने विपरीत दिशाओं से आकर मिलती है।
∎ सार्वजनिक भवनों में इस प्रकार की जीना, भव्यता की दृष्टि से भी लगाया जाता है।