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Q: .
  • A. महाभोज
  • B. अंजो दीदी
  • C. सिन्दूर की होली
  • D. बकरी
Correct Answer: Option D - ‘बकरी’ नाटक में ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ तथा ‘रघुपति राघव राजाराम’ आदि का सृजनात्मक व्यंग्यपरक अर्थ दिया गया है। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना द्वारा रचित बकरी (1974 ई.) नाटक में राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार, आम आदमी का शोषण और गाँधीवाद के नाम पर सत्ता हथियाने और उनके सिद्धांतो को नजरंदाज करने वाले नेताओं पर व्यंग्य किया गया है। इसमें ‘बकरी’ गरीब जनता का प्रतीक है। नाटक की कथा वस्तु दो अंकों में विभाजित है तथा प्रत्येक अंक में तीन-तीन दृश्य हैं। सक्सेना जी ने दो अन्य नाटक ‘लड़ाई (1979 ई.) तथा ‘अब गरीबी हटाओ लिखे हैं। ‘महाभोज’ (1982 ई.) मन्नू भंडारी द्वारा, ‘अंजो दीदी’ (1955 ई.) उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ द्वारा तथा ‘सिंदूर की होली’ (1934 ई.) लक्ष्मीनारायण मिश्र द्वारा रचित नाटक हैं।
D. ‘बकरी’ नाटक में ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ तथा ‘रघुपति राघव राजाराम’ आदि का सृजनात्मक व्यंग्यपरक अर्थ दिया गया है। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना द्वारा रचित बकरी (1974 ई.) नाटक में राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार, आम आदमी का शोषण और गाँधीवाद के नाम पर सत्ता हथियाने और उनके सिद्धांतो को नजरंदाज करने वाले नेताओं पर व्यंग्य किया गया है। इसमें ‘बकरी’ गरीब जनता का प्रतीक है। नाटक की कथा वस्तु दो अंकों में विभाजित है तथा प्रत्येक अंक में तीन-तीन दृश्य हैं। सक्सेना जी ने दो अन्य नाटक ‘लड़ाई (1979 ई.) तथा ‘अब गरीबी हटाओ लिखे हैं। ‘महाभोज’ (1982 ई.) मन्नू भंडारी द्वारा, ‘अंजो दीदी’ (1955 ई.) उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ द्वारा तथा ‘सिंदूर की होली’ (1934 ई.) लक्ष्मीनारायण मिश्र द्वारा रचित नाटक हैं।

Explanations:

‘बकरी’ नाटक में ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ तथा ‘रघुपति राघव राजाराम’ आदि का सृजनात्मक व्यंग्यपरक अर्थ दिया गया है। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना द्वारा रचित बकरी (1974 ई.) नाटक में राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार, आम आदमी का शोषण और गाँधीवाद के नाम पर सत्ता हथियाने और उनके सिद्धांतो को नजरंदाज करने वाले नेताओं पर व्यंग्य किया गया है। इसमें ‘बकरी’ गरीब जनता का प्रतीक है। नाटक की कथा वस्तु दो अंकों में विभाजित है तथा प्रत्येक अंक में तीन-तीन दृश्य हैं। सक्सेना जी ने दो अन्य नाटक ‘लड़ाई (1979 ई.) तथा ‘अब गरीबी हटाओ लिखे हैं। ‘महाभोज’ (1982 ई.) मन्नू भंडारी द्वारा, ‘अंजो दीदी’ (1955 ई.) उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ द्वारा तथा ‘सिंदूर की होली’ (1934 ई.) लक्ष्मीनारायण मिश्र द्वारा रचित नाटक हैं।