search
Q: आंतरिक सज्जा का मूलभूत सिद्धांत है:
  • A. अनुरूपता तथा अनुपात
  • B. संतुलन
  • C. लय एवं बल
  • D. उपर्युक्त सभी
Correct Answer: Option D - आंतरिक सज्जा का मूलभूत सिद्धान्त अनुरूपता तथा अनुपात, संतुलन, लय एवं बल है। अनुरूपता- रेखा रूप आकार विचार बनावट अथवा रंग इत्यादि में एक समानता या एकरूपता का भाव उत्पन्न करना ही अनुरूपता कहलाता है। अनुपात-कला का एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है। जिसे सम्बन्धों का नियम Law of relationship भी कहते हैं। क्योंकि यह कला के तत्वों से सम्बन्धित होते हैं। कला का आशय किसी व्यक्ति की उचित माप एवं आकार से होता है। सन्तुलन-स्टैलासुन्दर राज के अनुसार ‘सन्तुलन स्थिरता व बल का समान वितरण है। यह विश्राम तथा शान्ति देता है। यह रंगो एवं आकृतियों के जैसे संयोजन द्वारा किया जाता है। जिसमें केन्द्र के दोनों ओर समान आकर्षण हो। लय- लय आँखों को गति प्रदान करती है। जो कि कला के तत्वों की नियमित वृद्धि अथवा माप को चिन्हित करती है। लय कला में गति प्रदान करती है। बल-केन्द्र में सबसे सुन्दर वस्तु रखकर उसके सामने और आस-पास कुछ अन्य वस्तुयें रखी जाती हैं। जिससे केन्द्र में रखी जाने वाली वस्तु की महत्ता इस बात को प्रदर्शित कर सके कि सज्जा का मुख्य बिन्दु क्या है और यही प्रदर्शन दबाव या बल कहलाता है।
D. आंतरिक सज्जा का मूलभूत सिद्धान्त अनुरूपता तथा अनुपात, संतुलन, लय एवं बल है। अनुरूपता- रेखा रूप आकार विचार बनावट अथवा रंग इत्यादि में एक समानता या एकरूपता का भाव उत्पन्न करना ही अनुरूपता कहलाता है। अनुपात-कला का एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है। जिसे सम्बन्धों का नियम Law of relationship भी कहते हैं। क्योंकि यह कला के तत्वों से सम्बन्धित होते हैं। कला का आशय किसी व्यक्ति की उचित माप एवं आकार से होता है। सन्तुलन-स्टैलासुन्दर राज के अनुसार ‘सन्तुलन स्थिरता व बल का समान वितरण है। यह विश्राम तथा शान्ति देता है। यह रंगो एवं आकृतियों के जैसे संयोजन द्वारा किया जाता है। जिसमें केन्द्र के दोनों ओर समान आकर्षण हो। लय- लय आँखों को गति प्रदान करती है। जो कि कला के तत्वों की नियमित वृद्धि अथवा माप को चिन्हित करती है। लय कला में गति प्रदान करती है। बल-केन्द्र में सबसे सुन्दर वस्तु रखकर उसके सामने और आस-पास कुछ अन्य वस्तुयें रखी जाती हैं। जिससे केन्द्र में रखी जाने वाली वस्तु की महत्ता इस बात को प्रदर्शित कर सके कि सज्जा का मुख्य बिन्दु क्या है और यही प्रदर्शन दबाव या बल कहलाता है।

Explanations:

आंतरिक सज्जा का मूलभूत सिद्धान्त अनुरूपता तथा अनुपात, संतुलन, लय एवं बल है। अनुरूपता- रेखा रूप आकार विचार बनावट अथवा रंग इत्यादि में एक समानता या एकरूपता का भाव उत्पन्न करना ही अनुरूपता कहलाता है। अनुपात-कला का एक महत्वपूर्ण सिद्धान्त है। जिसे सम्बन्धों का नियम Law of relationship भी कहते हैं। क्योंकि यह कला के तत्वों से सम्बन्धित होते हैं। कला का आशय किसी व्यक्ति की उचित माप एवं आकार से होता है। सन्तुलन-स्टैलासुन्दर राज के अनुसार ‘सन्तुलन स्थिरता व बल का समान वितरण है। यह विश्राम तथा शान्ति देता है। यह रंगो एवं आकृतियों के जैसे संयोजन द्वारा किया जाता है। जिसमें केन्द्र के दोनों ओर समान आकर्षण हो। लय- लय आँखों को गति प्रदान करती है। जो कि कला के तत्वों की नियमित वृद्धि अथवा माप को चिन्हित करती है। लय कला में गति प्रदान करती है। बल-केन्द्र में सबसे सुन्दर वस्तु रखकर उसके सामने और आस-पास कुछ अन्य वस्तुयें रखी जाती हैं। जिससे केन्द्र में रखी जाने वाली वस्तु की महत्ता इस बात को प्रदर्शित कर सके कि सज्जा का मुख्य बिन्दु क्या है और यही प्रदर्शन दबाव या बल कहलाता है।