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Q: निम्नलिखित वक्तव्यों पर विचार करें और नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें – कथन (A) : कुशीनगर मल्ल गणराज्य की राजधानी थी। कारण (R) : महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ था। कूट :
  • A. (A) एवं (R) दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
  • B. (A) एवं (R) दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • C. (A) सही है, परन्तु (R) गलत है।
  • D. (A) गलत है, परन्तु (R) सही है।
Correct Answer: Option B - गौतम बुद्ध धर्म का प्रचार करते हुए मल्लों की राजधानी पावा पहुँचे तथा यहाँ पर चुन्द नामक लुहार की आम्रवाटिका में ठहरे। उसने बुद्ध को भोजन कराया, जिससे उन्हें रक्तातिसार हो गया और भयानक पीड़ा उत्पन्न हुई। इसी वेदना को सहन करते हुए वे कुशीनारा पहुँचे। यहीं 483 ईसा पूर्व में 80 वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर त्याग दिया। इसे बौद्ध ग्रन्थों में `महापरिनिर्वाण' कहा गया है। मल्लों ने अत्यंत सम्मानपूर्वक उनका अंत्येष्टि संस्कार किया। मल्लों की राजधानी कुशीनगर भी थी। कुशीनारा को कुशावती (कुशीनगर) भी कहते हैं। यह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से 34 किमी दूर स्थित है। यहीं पर मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध स्तूप का निर्माण करवाया था। मल्लों ने बुद्ध के अस्थि-अवशेषों को संस्थागार में रखवा दिया था। जिसे बाद में भिक्षु द्रोण ने 8 भागों में बाँट दिया। महापरिनिर्वाण सूत्र के अनुसार बुद्ध के अस्थि-अवशेषों पर 8 स्तूपों का निर्माण विभिन्न लोगों ने करवाया- 1. अजातशत्रु (मगध), 2. लिच्छवी (वैशााली), 3. कपिलवस्तु के शाक्य, 4. अल्लकप्प के बुलि, 5. रामग्राम के कोलिय, 6. बेठद्वीप के ब्राह्मण, 7. पावा तथा कुशीनगर के मल्ल, 8. पिप्पलिवन के मौर्य (मोरिय)।
B. गौतम बुद्ध धर्म का प्रचार करते हुए मल्लों की राजधानी पावा पहुँचे तथा यहाँ पर चुन्द नामक लुहार की आम्रवाटिका में ठहरे। उसने बुद्ध को भोजन कराया, जिससे उन्हें रक्तातिसार हो गया और भयानक पीड़ा उत्पन्न हुई। इसी वेदना को सहन करते हुए वे कुशीनारा पहुँचे। यहीं 483 ईसा पूर्व में 80 वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर त्याग दिया। इसे बौद्ध ग्रन्थों में `महापरिनिर्वाण' कहा गया है। मल्लों ने अत्यंत सम्मानपूर्वक उनका अंत्येष्टि संस्कार किया। मल्लों की राजधानी कुशीनगर भी थी। कुशीनारा को कुशावती (कुशीनगर) भी कहते हैं। यह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से 34 किमी दूर स्थित है। यहीं पर मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध स्तूप का निर्माण करवाया था। मल्लों ने बुद्ध के अस्थि-अवशेषों को संस्थागार में रखवा दिया था। जिसे बाद में भिक्षु द्रोण ने 8 भागों में बाँट दिया। महापरिनिर्वाण सूत्र के अनुसार बुद्ध के अस्थि-अवशेषों पर 8 स्तूपों का निर्माण विभिन्न लोगों ने करवाया- 1. अजातशत्रु (मगध), 2. लिच्छवी (वैशााली), 3. कपिलवस्तु के शाक्य, 4. अल्लकप्प के बुलि, 5. रामग्राम के कोलिय, 6. बेठद्वीप के ब्राह्मण, 7. पावा तथा कुशीनगर के मल्ल, 8. पिप्पलिवन के मौर्य (मोरिय)।

Explanations:

गौतम बुद्ध धर्म का प्रचार करते हुए मल्लों की राजधानी पावा पहुँचे तथा यहाँ पर चुन्द नामक लुहार की आम्रवाटिका में ठहरे। उसने बुद्ध को भोजन कराया, जिससे उन्हें रक्तातिसार हो गया और भयानक पीड़ा उत्पन्न हुई। इसी वेदना को सहन करते हुए वे कुशीनारा पहुँचे। यहीं 483 ईसा पूर्व में 80 वर्ष की आयु में उन्होंने शरीर त्याग दिया। इसे बौद्ध ग्रन्थों में `महापरिनिर्वाण' कहा गया है। मल्लों ने अत्यंत सम्मानपूर्वक उनका अंत्येष्टि संस्कार किया। मल्लों की राजधानी कुशीनगर भी थी। कुशीनारा को कुशावती (कुशीनगर) भी कहते हैं। यह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से 34 किमी दूर स्थित है। यहीं पर मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध स्तूप का निर्माण करवाया था। मल्लों ने बुद्ध के अस्थि-अवशेषों को संस्थागार में रखवा दिया था। जिसे बाद में भिक्षु द्रोण ने 8 भागों में बाँट दिया। महापरिनिर्वाण सूत्र के अनुसार बुद्ध के अस्थि-अवशेषों पर 8 स्तूपों का निर्माण विभिन्न लोगों ने करवाया- 1. अजातशत्रु (मगध), 2. लिच्छवी (वैशााली), 3. कपिलवस्तु के शाक्य, 4. अल्लकप्प के बुलि, 5. रामग्राम के कोलिय, 6. बेठद्वीप के ब्राह्मण, 7. पावा तथा कुशीनगर के मल्ल, 8. पिप्पलिवन के मौर्य (मोरिय)।