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  • A. 2 3 4 1
  • B. 1 3 2 4
  • C. 4 3 2 1
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - सूची-I और सूची-II का सही सुमेलित उत्तर है- अध्याय रचना समय पृथ्वीराजरासो काण्ड रामचरितमानस खण्ड पद्मावत सर्ग साकेत साकेत- द्विवेदी युग के कवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना है। जो 1931 में प्रकाशित हुई थी। साकेत-12 सर्गों में विभक्त है। रामचरितमानस:- भक्ति काल के सगुण काव्य के रामभक्ति धारा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने इसकी रचना सं. 1631 में की जो सात काण्डों में विभक्त है। पद्मावत:- प्रेमाख्यानक काव्य परम्परा के प्रमुख सूफी कवि जायसी ने इसकी रचना 1540 ई. में की। पद्मावत में कुल 57 खण्ड है और इनका प्रिय अलंकार उत्पेक्षा है। पृथ्वीराज रासो- पृथ्वीराज रासो के लेखक चन्दवरदायी हैं। यह 69 समय में विभक्त है। इसकी भाषा डिंगल है। इसमें 68 छंदों का प्रयोग हुआ है।
C. सूची-I और सूची-II का सही सुमेलित उत्तर है- अध्याय रचना समय पृथ्वीराजरासो काण्ड रामचरितमानस खण्ड पद्मावत सर्ग साकेत साकेत- द्विवेदी युग के कवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना है। जो 1931 में प्रकाशित हुई थी। साकेत-12 सर्गों में विभक्त है। रामचरितमानस:- भक्ति काल के सगुण काव्य के रामभक्ति धारा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने इसकी रचना सं. 1631 में की जो सात काण्डों में विभक्त है। पद्मावत:- प्रेमाख्यानक काव्य परम्परा के प्रमुख सूफी कवि जायसी ने इसकी रचना 1540 ई. में की। पद्मावत में कुल 57 खण्ड है और इनका प्रिय अलंकार उत्पेक्षा है। पृथ्वीराज रासो- पृथ्वीराज रासो के लेखक चन्दवरदायी हैं। यह 69 समय में विभक्त है। इसकी भाषा डिंगल है। इसमें 68 छंदों का प्रयोग हुआ है।

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सूची-I और सूची-II का सही सुमेलित उत्तर है- अध्याय रचना समय पृथ्वीराजरासो काण्ड रामचरितमानस खण्ड पद्मावत सर्ग साकेत साकेत- द्विवेदी युग के कवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना है। जो 1931 में प्रकाशित हुई थी। साकेत-12 सर्गों में विभक्त है। रामचरितमानस:- भक्ति काल के सगुण काव्य के रामभक्ति धारा के प्रमुख कवि तुलसीदास ने इसकी रचना सं. 1631 में की जो सात काण्डों में विभक्त है। पद्मावत:- प्रेमाख्यानक काव्य परम्परा के प्रमुख सूफी कवि जायसी ने इसकी रचना 1540 ई. में की। पद्मावत में कुल 57 खण्ड है और इनका प्रिय अलंकार उत्पेक्षा है। पृथ्वीराज रासो- पृथ्वीराज रासो के लेखक चन्दवरदायी हैं। यह 69 समय में विभक्त है। इसकी भाषा डिंगल है। इसमें 68 छंदों का प्रयोग हुआ है।